जिस फहीम खान पर बनी ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, वह 22 साल बाद जेल से होगा रिहा

रांची, जमशेदपुर : झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान को रिहा करने के आदेश दिए हैं। 22 साल बाद उसकी जेल से रिहाई होगी। 1989 में सागिर हत्याकांड में उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान की 22 साल बाद जेल से रिहाई होने वाली है। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी 13 साल पहले बनी फिल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” में फैजल खान का किरदार फहीम खान से प्रेरित था। फहीम पर दो दर्जन से भी ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मुख्य रूप से उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। 1989 में सागिर हत्याकांड में उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

रिव्यू बोर्ड ने खारिज की याचिका

फहीम खान के अधिवक्ता ने क्रिमिनल रिट पीटेशन के तहत रिमिशन सेंटेंस (सजा में छूट देने की याचिका) फाइल किया था, जिसमें फहीम खान की ढलती उम्र और बीमारियों का हवाला देते हुए उसे जेल से मुक्त करने का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को रिव्यू बोर्ड बनाकर इसकी समीक्षा का आदेश दिया था। रिव्यू बोर्ड ने फहीम खान को समाज के लिए खतरा बताते हुए उसे जेल से छोड़ने से इनकार कर दिया था।

फैजल खान को गंभीर बीमारियां

कोर्ट में हुई सुनवाई में फहीम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने दलील देते हुए कोर्ट को बताया कि फहीम खान की उम्र 75 साल से अधिक हो चुकी है। अवकाश के दिनों को छोड़ दिया जाय तो फहीम खान 22 साल से भी अधिक समय से जेल में बंद है। वह गंभीर बीमारियों से घिर चुका है। उसे दिल और गुर्दे की बीमारी है। इसलिए उसकी सजा को माफ करते हुए उसे जेल से रिहा किया जाय। जस्टिस ने अधिवक्ता के दलीलों को स्वीकार करते हुए फहीम को छोड़ने का आदेश दिया।

हत्या के मामले में हुई उम्रकैद

वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान पर कुल 3 दर्जन से भी ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने पहली बार 1989 में अपराध किया था, जब 10 मई 1989 को वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की सिर में गोली मारकर हत्या की गई थी। फहीम खान को इस हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा उन पर हत्या और जबरन वसूली जैसे गंभीर कई अन्य मामलों में भी आरोप हैं।

फहीम खान

वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान की 22 साल बाद जेल से रिहाई होने वाली है। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी 13 साल पहले बनी फिल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” में फैजल खान का किरदार फहीम खान से प्रेरित था। फहीम पर दो दर्जन से भी ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मुख्य रूप से उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। 1989 में सागिर हत्याकांड में उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी।

झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के अंदर जेल से रिहा करने का आदेश दिया। वह फिलहाल जमशेदपुर की घाघीडीह जेल में वासेपुर के सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या में आजीवन सजा काट रहा है। फहीम खान ने हाईकोर्ट में 29 नवंबर 2024 को याचिका दायर करते हुए अपनी रिहाई की गुहार लगाई थी।

फहीम खान को गंभीर बीमारियां

कोर्ट में हुई सुनवाई में फहीम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने दलील देते हुए कोर्ट को बताया कि फहीम खान की उम्र 75 साल से अधिक हो चुकी है। अवकाश के दिनों को छोड़ दिया जाय तो फहीम खान 22 साल से भी अधिक समय से जेल में बंद है। वह गंभीर बीमारियों से घिर चुका है। उसे दिल और गुर्दे की बीमारी है। इसलिए उसकी सजा को माफ करते हुए उसे जेल से रिहा किया जाय। जस्टिस ने अधिवक्ता के दलीलों को स्वीकार करते हुए फहीम को छोड़ने का आदेश दिया।

हत्या के मामले में हुई उम्रकैद

वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान पर कुल 3 दर्जन से भी ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने पहली बार 1989 में अपराध किया था, जब 10 मई 1989 को वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की सिर में गोली मारकर हत्या की गई थी। फहीम खान को इस हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा उन पर हत्या और जबरन वसूली जैसे गंभीर कई अन्य मामलों में भी आरोप हैं।

फहीम खान पर दर्ज हत्या के मामले

सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या (वासेपुर हत्याकांड) जिसमें 2011 में फहीम खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई

रेलवे ठेकेदार इरफान खान की हत्या

धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या

ठेकेदार संजय सिंह पर गोलीबारी

साबिर आलम की हत्या की कोशिश

कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान पर ऐसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, रंगदारी, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। यह गैंगस्टर परिवार के घातक व लड़ाई-झगड़े का केंद्र रहा है। इस सबूतों और मामले के आधार पर फहीम खान धनबाद के सबसे खतरनाक और बदनाम अपराधियों में से एक माने जाते रहे हैं। वह 2007 से जेल में हैं। हालांकि, झारखण्ड हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनके रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

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