जमशेदपुर में मानवता की मिसाल बने डॉ. नागेंद्र सिंह, इंसानियत को रखा पैसों से ऊपर
- गरीब महिलाओं की मुफ्त सर्जरी कर बचाई दो जिंदगियां
- दर्द, लाचारी और करुणा से निकली उम्मीद की कहानी
जमशेदपुर। जहां आज इलाज का नाम सुनते ही आम आदमी के मन में बिल और खर्च का डर बैठ जाता है, वहीं जमशेदपुर के एक डॉक्टर ने ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसने साबित किया कि डॉक्टर सिर्फ पेशे से नहीं, दिल से भी डॉक्टर होते हैं।
पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा क्षेत्र की दो गरीब महिलाओं की जिंदगी तब बची, जब, जमशेदपुर में मानगो डिमना रोड पर
स्थित गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर नागेंद्र सिंह ने पैसों से ऊपर इंसानियत को रखा।
उन्होंने दोनों महिलाओं की मुफ्त सर्जरी कर न सिर्फ उन्हें नया जीवन दिया, बल्कि मानवता का चेहरा भी रोशन किया।
पहली कहानी : मंजूला महतो — बछड़ा-बकरी बेचने को तैयार, डॉक्टर ने कहा नहीं, इलाज मुफ्त होगा
पटमदा के दिघी गांव की मंजूला महतो पिछले छह महीने से पेट दर्द से परेशान थीं। जड़ी-बूटी से इलाज कर किसी तरह दर्द सहती रहीं, लेकिन हालत गंभीर हो गई।
जांच में पता चला कि बच्चेदानी में ट्यूमर है, जो आंत से चिपक गया है। अस्पताल में सर्जरी का खर्च करीब ₹60,000 बताया गया।
खर्च सुनते ही मंजूला रो पड़ीं — बोलीं, “घर में दो बछड़ा और एक बकरी है, उसे बेचकर पैसा दे दूंगी।”
इस पर डॉ. नागेंद्र सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि न आपको बछड़ा बेचना है, न बकरी। इलाज मैं मुफ्त करूंगा।और उन्होंने बिना एक रुपये लिए सर्जरी कर उनकी जान बचाई।
दूसरी कहानी : अंबिका कर्मकार — विधवा पेंशन पर चल रहा जीवन, डॉक्टर ने दिया जीवनदान
पटमदा की ही अंबिका कर्मकार की स्थिति भी बेहद दयनीय थी। पति का एक साल पहले निधन हो चुका था, बाल-बच्चा कोई नहीं।
विधवा पेंशन से गुजर-बसर कर रहीं अंबिका की बच्चेदानी में भी ट्यूमर था। पैसे न होने के कारण वे जड़ी-बूटी से इलाज करती रहीं, लेकिन स्थिति बिगड़ती चली गई।
जब वे डॉ. नागेंद्र सिंह के पास पहुंचीं, तो उन्होंने बिना कुछ लिए उनकी सर्जरी की और जीवनदान दिया।
यह सिर्फ इलाज नहीं, मानवता की जीत है
डॉ. नागेंद्र सिंह का यह कदम जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
दो महिलाओं की मुफ्त सर्जरी ने यह साबित किया कि इंसानियत जिंदा है, बस उसे जीने का साहस चाहिए।
