Devuthani Ekadashi 2025: भगवान विष्णु को समर्पित देवउठनी एकादशी आज है। यह तिथि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है। इसे देवोत्थान एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
जमशेदपुर के मानगो निवासी पंडित मुन्ना पाठक के मुताबिक हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) के बाद इस दिन जागते हैं। भगवान के जागरण के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूरे विधि-विधान से पूजा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है, तथा रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं।
पूजा विधि
शास्त्री के मुताबिक देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके गंगाजल का छिड़काव करें। चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। धूप, दीप, फूल और नैवेद्य अर्पित कर भगवान की आरती करें। पूरे दिन व्रत रखकर सायंकाल दीपदान करें — इसे अत्यंत शुभ माना गया है।
देवउठनी एकादशी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह नई शुरुआत और शुभता का प्रतीक भी है। माना जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से उपासना करता है, उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है, और उसके जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
