हर महीने की सैलरी का वादा बना मजाक
ओवरटाइम काम, लेकिन भुगतान नहीं
कम वेतन में बढ़ता आर्थिक संकट
प्रबंधन ने बताया ग्लोबल कारण
जमीन आवंटन पर भी उठे सवाल
रांची: नोएडा में मजदूरों के आंदोलन की चिंगारी अभी बुझी नहीं थी, इसी बीच झारखंड की राजधानी रांची में भी आक्रोशित कामगारों का धैर्य जवाब दे गया। नोएडा में जली चिंगारी की आग अब झारखंड पहुंच चुकी है।

मजदूरों के मुद्दों पर नोएडा से शुरू हुआ विरोध अब झारखंड की राजधानी तक पहुंच गया है। रांची की एक प्रमुख गारमेंट कंपनी में कार्यरत करीब 3000 महिला कर्मचारियों ने मंगलवार को सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और यातायात बाधित कर दिया।
महिला कर्मियों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है और कई वर्षों से वेतन वृद्धि भी नहीं की गई है। हर महीने की 7 तारीख को भुगतान का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन यह वादा लगातार टूटता रहा है।
प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने बताया कि कम वेतन और भुगतान में देरी के कारण उनका जीवन संकट में आ गया है। 13 से 17 हजार रुपये की आय में से करीब 3 हजार रुपये किराए में खर्च होते हैं, ऐसे में समय पर वेतन न मिलने से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि उनसे रोज अतिरिक्त काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। वर्षों से वेतन वृद्धि न होने और अतिरिक्त काम का पैसा न मिलने से नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
वहीं, कंपनी प्रबंधन ने आर्थिक नुकसान और वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी मजबूरी जताई है। प्रबंधन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और व्यापारिक दबाव के कारण कंपनी प्रभावित हुई है।
हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि एक ओर नुकसान की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर उनसे लगातार उत्पादन लक्ष्य पूरा कराने का दबाव बनाया जाता है।
इस पूरे विवाद में फैक्ट्री को मिली जमीन भी चर्चा का विषय बन गई है। आरोप है कि पूर्व सरकार ने रोजगार सृजन के नाम पर पशुपालन विभाग की करीब 25 एकड़ जमीन बेहद कम कीमत पर कंपनी को आवंटित की थी, जिस पर अब टेक्सटाइल पार्क विकसित किया गया है।
