जमशेदपुर : झारखंड हाई कोर्ट ने कदमा के रामजनमनगर निवासी मुरलीधर शर्मा और उनकी फर्म मेसर्स रीना इंटरप्राइजेज के खिलाफ ईएसआईसी द्वारा दायर ₹5,77,394 की वसूली के आदेश को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है।
कोर्ट ने इस मामले में ईएसआईसी की जांच प्रक्रियाओं को अपर्याप्त मानते हुए यह फैसला सुनाया।
क्या है मामला?
मुरलीधर शर्मा ने जुस्को से काम की उम्मीद में रीना इंटरप्राइजेज नामक फर्म बनाई थी।
इस दौरान उन्होंने करीब 20 कर्मचारियों को कामगार के रूप में पंजीकृत कराया था। हालांकि, जुस्को से कोई वर्क ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उन्होंने अन्य स्थानों पर छोटे-मोटे ठेके के काम किए।
इसके बावजूद, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने वर्ष 2009 से 2014 तक की अवधि के लिए ₹5.77 लाख की बकाया राशि जमा करने का आदेश पारित कर दिया।
इस आदेश के तहत शर्मा का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
ESIC का पक्ष खारिज, निरीक्षण के अभाव में फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने कहा कि ईएसआईसी ने इस अवधि के दौरान फर्म का कोई निरीक्षण नहीं किया, और केवल कागजातों के आधार पर ही बकाया वसूली का आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने इसे प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण मानते हुए आदेश को रद्द कर दिया।
वकीलों की भूमिका
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने पैरवी की। सरकार की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार दुबे ने पक्ष रखा।
