रामगढ़ के परशाडीह जंगल में कुएं में गिरे दो हाथी के बच्चे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
रामगढ़ | झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला वन क्षेत्र स्थित परशाडीह जंगल में बुधवार सुबह एक विनाशकारी दृश्य सामने आया, जब दो हाथी के बच्चे (काल्फ) अचानक एक सूखे कुएं में गिर गए।
जैसे ही घटना की जानकारी ग्रामीणों को मिली, मौके पर भारी भीड़ जुट गई और स्थिति को देखते हुए तुरंत वन विभाग को सूचित किया गया।
ग्रामीणों की सतर्कता से मिली जानकारी
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सुबह के समय जंगल की ओर से हाथियों के चिंघाड़ने और बच्चों की चीख-पुकार सुनाई दी।
पास जाकर देखने पर पता चला कि दो हाथी के बच्चे कुएं में गिर गए हैं और बाहर निकलने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं।
वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू
घटना की सूचना पर गोला वन प्रमंडल की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। अधिकारियों ने जेसीबी मंगवाई है और कुएं के आसपास की जमीन को समतल किया जा रहा है, ताकि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि बच्चों की हालत स्थिर है, लेकिन डर के कारण वे काफी बेचैन हैं। हम उन्हें शांत रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि रेस्क्यू में कोई खतरा न हो।
हाथियों के झुंड की निगरानी
माना जा रहा है कि हाथियों का पूरा झुंड पास के ही जंगल में मौजूद है और बच्चों की तलाश कर रहा है।
हाथी अत्यंत भावनात्मक और पारिवारिक जीव होते हैं, और संकट में पड़े अपने बच्चों को छोड़ते नहीं हैं।
इस वजह से वन विभाग की एक अतिरिक्त टीम झुंड पर नजर रखे हुए है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
हाथियों का स्वभाव: भावनात्मक, सामाजिक व सुरक्षात्मक
हाथियों को जंगल का सबसे संवेदनशील और सामाजिक जीव माना जाता है। ये अपने झुंड के साथ मजबूत पारिवारिक संबंध बनाते हैं। खासकर मादा हाथी अपने बच्चों के प्रति अत्यधिक सुरक्षात्मक होती हैं।
जब कोई हाथी संकट में होता है, तो पूरा झुंड उसकी मदद के लिए एकजुट हो जाता है। हाथी मनुष्यों की तरह भावनाएं महसूस कर सकते हैं, जैसे—दुख, खुशी, क्रोध और डर।
यही कारण है कि हाथियों के बच्चों के गिरने की खबर मिलते ही आसपास के जंगलों में झुंड की बेचैनी देखी जा रही है।
हाथी स्मृति प्रधान जीव होते हैं। उन्हें अपने साथ हुए घटनाओं की लंबे समय तक याद रहती है। अगर रेस्क्यू के दौरान किसी तरह की मानव-हस्तक्षेप से खतरे की अनुभूति होती है, तो वे आक्रामक भी हो सकते हैं।
प्रशासन व वन विभाग सतर्क
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे घटना स्थल से दूर रहें और अफवाह न फैलाएं, ताकि रेस्क्यू कार्य बाधित न हो। साथ ही, पुलिस बल भी तैनात किया गया है ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।
रेस्क्यू टीम को उम्मीद है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और बच्चों की स्थिति स्थिर रही, तो अगले कुछ घंटों में उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।
