मानगो मेयर चुनाव विवाद कोर्ट पहुंचा, संध्या सिंह ने परिणाम को दी चुनौती
जमशेदपुर: जमशेदपुर के मानगो नगर निगम में मेयर चुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व प्रत्याशी संध्या सिंह ने चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देते हुए गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
जमशेदपुर : मानगो नगर निगम के मेयर पद के चुनाव का मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। मेयर पद की प्रत्याशी रहीं संध्या सिंह ने जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में याचिका दायर कर घोषित चुनाव परिणाम को चुनौती दी है।
संध्या सिंह ने झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 580 और 582 के तहत याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि निर्वाचित प्रत्याशी ने नामांकन के दौरान गलत एवं भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की।
याचिका में कहा गया है कि संबंधित प्रत्याशी पहले कदमा क्षेत्र के मतदाता थे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उनका नाम मानगो क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा गया। संध्या सिंह का दावा है कि प्रत्याशी के वास्तविक निवास में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि मतदाता सूची में बदलाव केवल चुनाव लड़ने की पात्रता प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया।
इसके साथ ही मतदाता सूची में नाम स्थानांतरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, इस प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा आवश्यक जांच भी नहीं की गई, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि निर्वाचित प्रत्याशी का चुनाव अवैध घोषित किया जाए, 27 फरवरी 2026 को घोषित परिणाम को रद्द किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अब इस मामले में सभी की नजर अदालत के फैसले पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि मानगो नगर निगम चुनाव को लेकर उठे विवादों का क्या निष्कर्ष निकलता है।
सुधा गुप्ता ने आरोपों को बताया निराधार
मेयर सुधा गुप्ता ने संध्या सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इन्हें पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है और नामांकन के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा सभी दस्तावेजों की विधिवत जांच की गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के उनके खिलाफ भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जो मानहानि की श्रेणी में आता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वे कोर्ट के निर्णय का सम्मान करेंगी, लेकिन हार की निराशा में जनता को गुमराह करना उचित नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बगैर किसी ठोस प्रमाण के मीडिया में उनके खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है। यह मानहानि की श्रेणी में आता है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट का जो निर्णय होगा वह उसका सम्मान करेंगी लेकिन पराजय की हताशा में जनता को गुमराह करना गलत है।
