पूर्वी सिंहभूम जिले में दो कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठी, राकेश तिवारी ने प्रदेश सह प्रभारी से की चर्चा
कहा — सच्चे और समर्पित कार्यकर्ता को मिले नेतृत्व, जातीय समीकरण न हो प्राथमिकता
मुख्य बातें :
प्रदेश सचिव राकेश तिवारी ने उठाई दो जिलाध्यक्ष बनाने की मांग
जाति नहीं, समर्पण और कार्यकुशलता हो नियुक्ति का आधार
रांची मॉडल की तर्ज पर शहरी और ग्रामीण अध्यक्ष बनाने का सुझाव
पार्टी के संगठन सृजन अभियान को मजबूती देने की अपील
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में कांग्रेस जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर संगठन के अंदर मंथन तेज हो गया है। इसी क्रम में कांग्रेस प्रदेश सचिव सह पर्यवेक्षक राकेश तिवारी ने प्रदेश सह प्रभारी एवं एआईसीसी सचिव वेला प्रसाद से मुलाकात कर जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया को लेकर विस्तार से बातचीत की।
तिवारी ने कहा कि जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें तीन सामान्य वर्ग के लिए और तीन आरक्षित वर्ग (एससी/एसटी) के लिए हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद को जातिगत आधार पर न बांधा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की विचारधारा और पार्टी के लिए पूर्ण समर्पण रखने वाले, 24 घंटे पार्टी के लिए समर्पित रहने वाले कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता को ही जिला नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए — न कि किसी जातीय संतुलन को साधने के उद्देश्य से।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि जातिगत भागीदारी को लेकर चयन की प्रक्रिया को अनिवार्य माना जा रहा है, तो पूर्वी सिंहभूम जिले को रांची मॉडल पर बांट दिया जाए। एक शहरी जिलाध्यक्ष हो जो सामान्य वर्ग से हो, और एक ग्रामीण जिलाध्यक्ष हो जो आरक्षित वर्ग (एससी/एसटी/ओबीसी) से हो। इससे संगठन में संतुलन भी बना रहेगा और कार्यकुशल नेतृत्व भी उभरेगा।
तिवारी ने कहा कि अगर पार्टी केवल जातीय समीकरणों पर ध्यान देगी, तो संगठन सृजन की जो मुहिम चलाई जा रही है, उस पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि वे ऐसे निर्णय लें जो पार्टी के जमीनी ढांचे को और मजबूत करें, न कि अंदरूनी असंतोष को जन्म दें।
इस मौके पर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह माथारू, वर्तमान जिलाध्यक्ष आनंद बिहारी दुबे और प्रदेश सचिव कमलेश पांडे भी उपस्थित थे।
