रांची में खादी एवं सरस महोत्सव का समापन
खादी महोत्सव के समापन समारोह में राज्यपाल ने कारीगरों की प्रशंसा की
प्रमुख बिंदु:
- 18 दिनों के सफल आयोजन के बाद खादी एवं सरस महोत्सव का समापन।
- राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने खादी के सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया।
- अंतिम दिन 20,000 से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया।
रांची – मोरहाबादी मैदान में 20 दिसंबर से आयोजित खादी एवं सरस महोत्सव आज एक जीवंत समापन समारोह के साथ संपन्न हो गया। मुख्य अतिथि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कारीगरों को शुभकामनाएं दीं और भारत की सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम से खादी के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला।
राज्यपाल और नेताओं ने खादी के महत्व पर प्रकाश डाला
राज्यपाल गंगवार ने अपने भाषण में कहा, “खादी हमारी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमें भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाती है।” श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने इस बात पर जोर दिया कि खादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की परिकल्पना “सभी के लिए नौकरी” के दृष्टिकोण के अनुरूप है। राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए खादी उद्योगों की सराहना करते हुए कहा, “खादी को बढ़ावा देने से महिला सशक्तिकरण को काफी बढ़ावा मिलता है।”
महोत्सव की लोकप्रियता और सफलता
उत्सव की अपार लोकप्रियता स्पष्ट थी क्योंकि केवल सोमवार को ही 20,000 से अधिक आगंतुक आयोजन स्थल पर एकत्र हुए थे। 100 से अधिक स्टालों वाले इस महोत्सव में विभिन्न प्रकार के खादी उत्पाद और हस्तशिल्प पेश किए गए। आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक खरीदारी की और कार्यक्रम के दौरान विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
परंपरा और सशक्तिकरण का उत्सव
खादी और सरस महोत्सव ने न केवल भारत की समृद्ध परंपराओं का जश्न मनाया बल्कि स्थानीय कारीगरों और उद्योगों का भी समर्थन किया। इसकी सफलता खादी के प्रति बढ़ती सार्वजनिक सराहना और समुदायों को सशक्त बनाने और विरासत को संरक्षित करने में इसकी भूमिका को दर्शाती है।
