पूर्व मंत्री ने शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताया, आरोप लगाने वाले को चुनौती दी
प्रमुख बिंदु:
• रॉय ने भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन किया, एफआईआर को झूठ का पुलिंदा बताया
• स्वास्थ्य मंत्री गुप्ता पर शिकायत को षडयंत्रपूर्वक कराने का आरोप
• आलोचकों को प्रासंगिक दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से जारी करने की चुनौती
जमशेदपुर – जमशेदपुर पूर्वी के विधायक और झारखंड के पूर्व मंत्री सरयू राय ने भ्रष्टाचार के आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए एफआईआर को राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया।
रॉय ने रांची के अरगोड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को जोरदार तरीके से खारिज कर दिया।
रॉय ने जोर देकर कहा, “यह एफआईआर अर्धसत्य और विकृत तथ्यों पर आधारित झूठ का पुलिंदा मात्र है।”
उन्होंने दावा किया कि यह शिकायत झारखंड के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री के इशारे पर दर्ज की गई थी। बन्ना गुप्ता.
रॉय का आरोप है कि गुप्ता पूर्व कांग्रेस सांसद डॉ. अजय कुमार के साथ मिलकर इस एफआईआर का इस्तेमाल उनकी छवि खराब करने के लिए दुष्प्रचार सामग्री के रूप में कर रहे हैं।
रॉय ने कहा, “वे इस मनगढ़ंत शिकायत का मेरे खिलाफ प्रचार के साधन के रूप में फायदा उठा रहे हैं।”
विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि 2021 से अब तक कई बार इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं और प्रचारित किए गए हैं।
आरोपों का कालक्रम
रॉय ने इन आरोपों का इतिहास सावधानीपूर्वक रेखांकित किया है:
मार्च 2021 में जमशेदपुर भाजपा नेता अभय सिंह ने सबसे पहले ये आरोप लगाए थे।
भाजपा नेता देवेंद्र सिंह ने नवंबर 2022 में आरोपों को दोहराया।
तत्कालीन जिला अध्यक्ष गुंजन यादव के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई 2021 को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था।
जमशेदपुर जिला भाजपा महासचिव राकेश सिंह ने 4 जुलाई 2021 को आरोप दोहराया।
टेल्को निवासी जी. कुमार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को इसी तरह का दावा करते हुए पत्र लिखा।
गायत्री नगर के विनय कुमार ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
रॉय ने टिप्पणी की, “निराधार आरोपों को लगातार दोहराना विक्षुब्ध मस्तिष्कों द्वारा मंच पर शिकार करने के समान है।”
आहार पत्रिका विवाद
आहार पत्रिका मुद्दे पर चर्चा करते हुए रॉय ने विस्तृत स्पष्टीकरण दिया:
पत्रिका के प्रकाशक और मुद्रक का चयन पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया।
सभी जिला आपूर्ति कार्यालयों ने निर्धारित संख्या में पत्रिका प्रतियां प्राप्त होने की पुष्टि की।
रॉय ने दृढ़तापूर्वक कहा, “खाद्य आपूर्ति मंत्री एक घोटाला गढ़ रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ है ही नहीं।”
उन्होंने गुप्ता को चुनौती दी कि वे उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का निष्पक्षता से खंडन करें।
रॉय ने कहा, “मैं मंत्री गुप्ता को चुनौती देता हूं कि वे संबंधित फाइल के पन्नों को सार्वजनिक करें।”
आरोप लगाने वाले से पूछताछ
रॉय ने शिकायतकर्ता मनोज सिंह की विश्वसनीयता पर संदेह जताया:
उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह का अतीत विवादास्पद रहा है और वह पहले भी कानून से जुड़े रहे हैं।
रॉय ने दावा किया, “सिंह कथित तौर पर रांची में एक बड़े ‘अवांछित समूह’ से जुड़े हुए हैं।”
विधायक ने दावा किया कि सिंह वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।
जवाबी आरोप और चुनौती
रॉय ने गुप्ता के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा:
उनका दावा है कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में घोटाले के सबूत मुहैया कराए हैं।
रॉय ने इस साक्ष्य पर कार्रवाई न करने के लिए मुख्यमंत्री की आलोचना की।
रॉय ने कहा, “मैंने गुप्ता के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग में हुए कई घोटालों के बारे में शिकायतें दर्ज कराई हैं।”
उन्होंने गुप्ता को चुनौती दी कि वे अपने ऊपर लगे किसी भी आरोप को गलत साबित करें।
रॉय ने टिप्पणी की, “वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय, वे इस एफआईआर का उपयोग ध्यान भटकाने की रणनीति के रूप में कर रहे हैं।”
पारदर्शिता का आह्वान
रॉय ने आहार पत्रिका मुद्दे से संबंधित प्रासंगिक फाइल से तथ्य प्रस्तुत करते हुए अपना निष्कर्ष निकाला।
उन्होंने इस मामले में पूर्ण पारदर्शिता की अपनी मांग दोहराई।
रॉय ने कहा, “मैं मंत्री गुप्ता को चुनौती देता हूं कि वे इनमें से किसी भी दस्तावेजी तथ्य को गलत साबित करें।”
विधायक सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहते हैं कि एफआईआर उन्हें बदनाम करने का एक राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रयास है।
जैसे-जैसे यह विवाद सामने आ रहा है, यह झारखंड में पहले से ही गरम राजनीतिक माहौल को और गरमाता जा रहा है।
