झारखंड के सीएम के वैक्सीन संबंधी बयान से राजनीतिक विवाद छिड़ा
भाजपा ने कोविड-19 वैक्सीन पर टिप्पणी के लिए सोरेन से माफी की मांग की
कोविड-19 टीकों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विवादित बयानों से झारखंड में गरमागरम राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
जमशेदपुर – झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों भर्ती परीक्षाओं के दौरान हुई मौतों के संबंध में दिए गए अपने बयानों के लिए आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।
सोरेन ने कथित तौर पर दावा किया था कि महामारी के दौरान “खांसी और सर्दी” के कारण कई लोग मारे गए।
उन्होंने इन मौतों और टीकों के खतरों के बीच संबंध का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर टीकाकरण अभियान का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि महामारी के दौरान झूठे बहाने से धन एकत्र किया गया।
सोरेन ने एक पूर्व सांसद की बेटी की “साधारण बीमारी” से हुई मौत का हवाला दिया।
भाजपा नेता सतबीर सिंह सोमू ने सोरेन से माफी की मांग की।
सोमू ने इसे भारत के वैज्ञानिक समुदाय का अपमान बताया।
उन्होंने सोरेन पर भाजपा को अनुचित रूप से बदनाम करने का आरोप लगाया।
सोमू ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोरेन को सार्वजनिक रूप से पश्चाताप करना चाहिए।
उन्होंने धमकी दी कि यदि मुख्यमंत्री द्वारा अपने टीकाकरण विरोधी बयान के लिए माफी नहीं मांगी गई तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे और पुतला जलाएंगे।
सोरेन की विपक्षी नेताओं द्वारा गलत जानकारी प्रसारित करने के लिए आलोचना की जाती है।
उनका तर्क है कि उनकी टिप्पणियों से टीकों में जनता का विश्वास कम हो गया है।
यह विवाद वास्तव में राज्य आबकारी विभाग द्वारा आयोजित जांच के दौरान हुई मौतों का परिणाम है, क्योंकि यह टिप्पणी उसके बाद की गई थी।
सोरेन के बयानों से टीके की सुरक्षा को लेकर चर्चा फिर से शुरू हो गई है।
उनके आलोचकों ने उन पर कोविड-19 से निपटने के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
यह घटना महामारी के प्रशासन से जुड़े लगातार राजनीतिक तनाव को रेखांकित करती है।
