उषा देवी ने 2020 में बेटे पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र किया, कोर्ट में पांच आरोपियों के नाम बताए
जिरह के दौरान पीड़िता का आपराधिक इतिहास सामने आया, बचाव पक्ष ने मां के बयान पर सवाल उठाए।
जमशेदपुर – 1 अक्टूबर, 2020 को उलीडीह खड़िया बस्ती के पास मारे गए शैंकी यादव हत्याकांड के मुकदमे में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब शुक्रवार को पीड़ित की मां उषा देवी ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-4 आनंद मणि त्रिपाठी के समक्ष गवाही दी।
उषा देवी ने अपने बेटे की मौत की पूरी घटना बताते हुए कहा कि शैंकी शाम करीब 6:00-6:30 बजे घर से साकची बस स्टैंड के लिए निकला था।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजेश सिंह, रोहन सिंह, शुभम सिंह, उत्तम लोहार और शेखर ने एक वाहन में शैंकी का पीछा किया।
“जब मैं परिवार के सदस्यों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा तो वे पहले ही वहां से जा चुके थे। मारे गए ऊषा देवी ने अदालत को बताया, “शंकी और हम टाटा सफारी में जा रहे थे।”
उन्होंने बताया कि उनके बेटे का शव कथित तौर पर ईंटों और पत्थरों से पीटा गया था और एक वाहन द्वारा कुचल दिया गया था।
उषा देवी ने अपने भतीजे दीपक और कुछ आरोपियों के बीच हुए एक पूर्व विवाद का जिक्र किया, जिससे संभावित मकसद का पता चलता है।
जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने शैंकी की आपराधिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए तथा उसके खिलाफ लंबित दस से अधिक गंभीर मामलों का हवाला दिया।
बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि शैंकी ने उस दिन राजेश सिंह की टाटा सफारी पर तीन गोलियां चलाई थीं, लेकिन उषा देवी ने इस दावे का खंडन किया।
यह भी उल्लेख किया गया कि शैंकी को देश से निकाल दिया गया था, फिर भी वह शहर में था, यह भी एक मुद्दा था जिस पर उसकी मां ने सवाल उठाया।
इस मामले में छह आरोपी शामिल हैं: शुभम सिंह, चंद्रशेखर रक्षित, रोहन सिंह, उत्तम लोहार उर्फ दीपू उर्फ विश्वकर्मा, राजेश सिंह और संतोष तिवारी उर्फ मिथिलेश।
यह गवाही मुकदमे में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो शैंकी यादव की मौत से जुड़ी घटनाओं के बारे में परस्पर विरोधी आख्यानों को प्रकाश में लाती है।
जैसे-जैसे मुकदमा आगे बढ़ेगा, अदालत इस जटिल मामले के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए इन गवाहियों को अन्य साक्ष्यों के साथ तौलेगी।
