रिपोर्ट में कमियों पर प्रकाश डाला गया और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए सिफारिशें की गईं
जमशेदपुर – राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की विशेष प्रतिवेदक एवं पूर्व आईएएस अधिकारी सुचित्रा सिंहा ने जमशेदपुर सदर अस्पताल का निरीक्षण किया।
उन्होंने अस्पताल की कमियों पर आंकड़े एकत्र किये और अपने निष्कर्ष एनएचआरसी को सौंपे।
निरीक्षण में सभी विभाग शामिल थे, तथा पहचाने गए मुद्दों के समाधान और चिकित्सा सेवाओं में सुधार के लिए अस्पताल अधीक्षक के साथ चर्चा की गई।
प्रमुख कमियों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, जैसे सामान्य फिजीशियन, आर्थोपेडिक सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञों की कमी शामिल थी, जिसके परिणामस्वरूप मरीज पर्याप्त चिकित्सा देखभाल से वंचित रह जाते थे।
वर्तमान में अस्पताल में दो ऑपरेशन थियेटर हैं, लेकिन सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर की आवश्यकता है।
सिविल सर्जन ने बताया कि प्रधान सचिव के निर्देशानुसार झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग को मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर के लिए मांग पत्र भेज दिया गया है।
सदर अस्पताल स्थित कुपोषण उपचार केंद्र स्थान की कमी और विभागीय स्वीकृति के अभाव में चालू नहीं हो पा रहा है।
सिंघा ने कम से कम एक कार्यात्मक कुपोषण उपचार केंद्र की महत्ता पर बल दिया।
अस्पताल को आवश्यक मशीनों और उपकरणों की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें एक अल्ट्रासाउंड मशीन भी शामिल है, जिसे वर्तमान में हेल्थ मैप के साथ समझौता ज्ञापन के तहत संचालित किया जाता है।
सदर अस्पताल में अपनी अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है और उसे एक अतिरिक्त पोर्टेबल यूएसजी मशीन की आवश्यकता है।
पिछले 10 वर्षों से 300-एमए डिजिटल एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा है, तथा नवीनतम अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की आवश्यकता है।
अस्पताल में चार डायलिसिस मशीनें हैं, लेकिन मरीजों की मांग को पूरा करने के लिए तीन और मशीनों की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, अस्पताल के रक्त बैंक में स्थान उपलब्ध होने के बावजूद विभाजक इकाई का अभाव है।
वर्तमान सुविधा के पीछे 100 बिस्तरों वाला एक पूर्व-निर्मित अस्पताल भवन निर्माणाधीन है।
इसके पूरा हो जाने पर, इससे पहले बंद पड़े जेरिएट्रिक, मिल्क बैंक और एमटीसी जैसे विभाग भी कार्यशील हो जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओपीडी, इमरजेंसी वार्ड, डायलिसिस सेंटर, महिला वार्ड, बाल चिकित्सा वार्ड, आईसीयू व अन्य विभागों की भी समीक्षा की।
