माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नडेला पीएम मोदी से मिले, भारत में 17.5 अरब डॉलर के बड़े निवेश का ऐलान

दिल्ली : माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत के ‘एआई फर्स्ट’ भविष्य के लिए 17.5 अरब डॉलर (लगभग 1.57 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की। नडेला ने कहा कि यह माइक्रोसॉफ्ट का एशिया में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। यह निवेश भारत में इन्‍फ्रास्ट्रक्चर, स्किल्स और संप्रभु क्षमताओं के निर्माण में मदद करेगा। सत्‍या नडेला ने यह ऐलान ऐसे समय किया है जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं। उन्‍होंने भारतीय चावल निर्यात पर भी नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

सत्या नडेला ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘देश की महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट भारत के ‘एआई फर्स्ट’ भविष्य के लिए आवश्यक इन्‍फ्रास्ट्रक्चर, स्किल्स और संप्रभु क्षमताओं यानी सॉवरेन केपेबिलिटी के निर्माण में मदद के लिए 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश कर रहा है। यह एशिया में हमारा सबसे बड़ा निवेश है।’ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत के एआई अवसर पर हुई बातचीत को प्रेरणादायक बताया।

कैसे मदद करेगा यह भारी भरकम न‍िवेश?

यह भारी-भरकम निवेश भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करेगा। एआई एक ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में सक्षम बनाती है। इस निवेश से भारत में एआई से जुड़ी नई फैक्ट्रियां लगेंगी, लोगों को एआई के बारे में सिखाया जाएगा और देश अपनी एआई तकनीक खुद विकसित कर पाएगा।

यह घोषणा भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे देश की तकनीकी क्षमताएं बढ़ेंगी और वह दुनिया में एआई के क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकेगा। यह निवेश भारत के डिजिटल भविष्य को और भी मजबूत बनाएगा।

इस मुलाकात के क्‍या हैं मायने?

माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक मायने हैं। माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक तकनीकी दिग्गज का इतना बड़ा निवेश भारत में व्यापार करने के माहौल और उसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था की क्षमता में विश्वास को दर्शाता है। यह अन्य अंतरराष्‍ट्रीय कंपनियों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। पीएम मोदी की नडेला के साथ मुलाकात भारत के शीर्ष नेतृत्व का बिग टेक के साथ सीधे और गहरे संबंध बनाने की रणनीति का हिस्सा है ताकि तकनीकी सहयोग को बढ़ाया जा सके। निवेश का ऐलान ऐसे समय में हुआ जब भारत और अमेरिका एक व्‍यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। हालांकि, ट्रंप के टैरिफ से दोनों देशों के बीच हल्‍का मन-मुटाव भी है।

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