म्यूनिख। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका के दावों के बीच भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। डॉ. एस. जयशंकर ने दो टूक कहा है कि भारत अपने ऊर्जा संबंधी फैसले उपलब्धता, कीमत और जोखिम को ध्यान में रखकर ही लेगा और उसकी रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं होगा।
दरअसल, हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो ने दावा किया कि भारत रूस से अतिरिक्त कच्चा तेल आयात रोकने पर सहमत हो गया है। रुबियो ने कहा था कि रूस के ऊर्जा निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद भारत ने अतिरिक्त रूसी तेल नहीं खरीदने का भरोसा दिया है।
शनिवार को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जयशंकर ने इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र निर्णय लेने के सिद्धांत पर आधारित है और यह उसकी ऐतिहासिक सोच और विकास यात्रा का अहम हिस्सा है।
जयशंकर ने कहा, “हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध हैं। यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सोच का हिस्सा है।”
ऊर्जा बाजार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक तेल बाजार बेहद जटिल है। भारत की तेल कंपनियां अन्य देशों की तरह उपलब्धता, कीमत और संभावित जोखिमों का आकलन कर निर्णय लेती हैं।
जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीद बंद करेगा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर सवाल यह है कि क्या मैं स्वतंत्र सोच रखूंगा और अपने फैसले लूंगा, तो हां—ऐसा हो सकता है कि हमारे फैसले दूसरों की सोच से मेल न खाएं।”
गौरतलब है कि अब तक भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर न तो अमेरिका के दावों की पुष्टि की है और न ही उनका खंडन किया है।
