Digital Evaluation : सीबीएसई प्रत्येक वर्ष भारत समेत 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आयोजित करता है। इस परीक्षा में लगभग 45 से 50 लाख छात्र शामिल होते हैं। नई बात यह है सीबीएसई 2026 से कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष से कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल माध्यम से ही किया जाएगा जबकि 10वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का पूर्व की तरह ही भौतिक पद्धति से ही होगा।
सीबीएसई ने 9 फरवरी को सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को जारी सर्कुलर में कहा कि यह कदम मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं।
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा है कि ओएसएम प्रणाली से अंकों की जोड़ में होने वाली त्रुटियां समाप्त होंगी और स्वचालित समन्वय के कारण मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम रहेगा। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होगी और अधिक शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
मूल्यांकन अब स्कूल से ही कर सकेंगे शिक्षक
परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि शिक्षक अपने ही स्कूल परिसर से डिजिटल मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे समय की बचत के साथ यात्रा और अन्य खर्चों में भी कमी आएगी। इसके साथ ही परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की प्रक्रिया की आवश्यकता भी नहीं रहेगी, जिससे अतिरिक्त जनशक्ति की जरूरत घटेगी।
बोर्ड के अनुसार, इस व्यवस्था से देश और विदेश स्थित सभी सीबीएसई संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों को मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसे पर्यावरण के अनुकूल डिजिटल सुधार भी बताया गया है।
तकनीकी ढांचे और प्रशिक्षण पर जोर
नई प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सीबीएसई ने स्कूलों को आवश्यक तकनीकी ढांचा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कंप्यूटर लैब, पब्लिक स्टैटिक आईपी, विंडोज 8 या उससे ऊपर का ऑपरेटिंग सिस्टम, न्यूनतम 4 जीबी रैम, अद्यतन वेब ब्राउजर, एडोबी रीडर, कम से कम 2 एमबीपीएस इंटरनेट स्पीड और निर्बाध बिजली आपूर्ति शामिल है।
सीबीएसई ने कहा कि स्कूलों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों, ड्राई रन, निर्देशात्मक वीडियो और एक समर्पित कॉल सेंटर के जरिए सहयोग दिया जाएगा। ओएएसआईएस आईडी वाले शिक्षक प्लेटफॉर्म से जुड़कर पहले से अभ्यास भी कर सकेंगे।
इससे पहले कभी-कभी छात्र और उनके अभिभावक मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। नई प्रक्रिया में मानवीय भूल की गुंजाईश कम रहेगी। इतना ही नहीं समय की बचत होगी और वित्तीय बोझ भी कम होगा।
