जमशेदपुर। लौहनगरी में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। सोनारी एक्सटेंशन रोड नंबर-7 की निवासी और झारखंड सरकार की सेवानिवृत्त अविवाहित शिक्षिका अंजलि बोस इस समय एमजीएम अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रही हैं।
विडंबना यह है कि उनके बैंक खाते में लगभग 25 लाख रुपए जमा हैं, लेकिन बैंक के तकनीकी नियमों के कारण उनके परिजनों के पास इलाज के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं है।
2009 में सेवानिवृत्त हुई थीं अंजलि दीदी
अंजलि बोस 2008-09 में कपाली स्थित विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई थीं। अविवाहित होने के कारण उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी इस उम्मीद में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की सोनारी शाखा में जमा की थी कि बुढ़ापे और बीमारी में यह पैसा काम आएगा। लेकिन आज जब उन्हें गंभीर स्थिति में टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) ले जाने की जरूरत है, तो बैंक ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
बैंक की दलील: मरीज खुद आए या नॉमिनी को भेजें
अंजलि बोस की छोटी बहन गायत्री बोस (वह भी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं) ने बताया कि बैंक मैनेजर का कहना है कि खाते में कोई नॉमिनी नहीं है, इसलिए पैसा केवल अंजलि बोस की उपस्थिति में ही निकलेगा।
परिजनों ने बैंक से गुहार लगाई कि वे खुद अस्पताल आकर मरीज की स्थिति देख लें या सीधे अस्पताल के खाते में इलाज की राशि स्थानांतरित कर दें, लेकिन बैंक अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया।
अंजलि बोस की छोटी बहन गायत्री बोस ने कहा कि अगर इलाज के अभाव में मेरी बहन की जान गई, तो मैं उनका पार्थिव शरीर लेकर सीधे स्टेट बैंक सोनारी शाखा जाऊंगी।
मेरी बहन का पैसा किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि सीधे अस्पताल को दे दिया जाए ताकि उनकी जान बच सके।
उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह एमजीएम अस्पताल पहुँचे। उन्होंने परिजनों की व्यथा सुनने के बाद इसे बेहद गंभीर मामला बताया। विकास सिंह ने तत्काल उपायुक्त (DC) पूर्वी सिंहभूम को मामले की जानकारी दी और उनसे मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
उन्होंने मांग की है कि प्रशासन बैंक प्रबंधन को निर्देशित करे ताकि अस्पताल के खर्च का भुगतान सीधे बैंक खाते से हो सके।
डॉक्टरों ने दी बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह
एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार अंजलि बोस की स्थिति नाजुक है और उन्हें बेहतर सुविधाओं वाले बड़े अस्पताल में स्थानांतरित करना अनिवार्य है। परिजनों का कहना है कि पैसा होने के बावजूद वे खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं।

