सिमुलतला-लहाबन के बीच मालगाड़ी पलटने से जयनगर टाटानगर एक्सप्रेस 18120 अब तक नहीं पहुंची जमशेदपुर, जानिए क्या है कारण

3 मिनटों का फासला और टल गई महा-तबाही, बाल-बाल बची यात्रियों से भरी ट्रेन

पूर्वांचल एक्सप्रेस बाल-बाल बची, मालगाड़ी के पटरी से उतरने से टली बड़ी टक्कर

सिमुलतला-लहाबन के बीच हुआ यह चमत्कारिक बचाव,हादसा सुनते ही सिहर जा रहे यात्री

जमशेदपुर, सिमुलतला (जमुई) : जयनगर से शनिवार को संध्या 7 :30 बजे खुलने वाली जयनगर टाटानगर एक्सप्रेस अब तक जमशेदपुर नहीं पहुंची। अमूमन दोपहर 12 बजे तक जमशेदपुर पहुंचने वाली ट्रेन संध्या चार बजे कोडरमा पहुंची है। संभवत: रात 8 बजे जमशेदपुर पहुंचेगी।

ट्रेन विलंबित होने की वजह जानकर लोग सिहर जा जा रहे हैं। हुआ यूं कि सिमुलतला और लहाबन के बीच शनिवार रात जो Train Accident हुआ। वह किसी संयोग से कम नहीं, बल्कि साक्षात ईश्वर का चमत्कार है। अगर घड़ियों की सुई में महज कुछ सेकेंड का भी फेरबदल होता, तो आज भारतीय रेल के इतिहास में एक और काला अध्याय जुड़ जाता। 15050 गोरखपुर-कोलकाता पूर्वांचल एक्सप्रेस में सवार हजारों यात्री मौत के मुहाने से वापस लौट आए हैं।

भयावह मंजर…

घटनास्थल का दृश्य देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। आसनसोल से सीतामढ़ी जा रही सीमेंट से लदी मालगाड़ी (अप लाइन) जिस वीभत्स तरीके से पटरी से उतरी, उसने तबाही की नई परिभाषा लिख दी।

मालगाड़ी के बेकाबू डिब्बे अपनी पटरी तोड़कर डाउन लाइन पर जा गिरे—वहीं डाउन लाइन, जिस पर से महज कुछ ही पल पहले यात्रियों से खचाखच भरी पूर्वांचल एक्सप्रेस गुजरी थी।


दृश्य इतना भयावह है कि सीमेंट से लदी बोगियां लोहे की पटरियों को चीरते हुए दूसरी तरफ जा गिरीं। अगर उस वक्त Purvanchal Express वहां होती, तो टक्कर इतनी भीषण होती कि लोहे के पुर्जे और इंसानी जिस्मों का फर्क मिट जाता। मौत और जिंदगी के बीच सिर्फ कुछ मिनटों’ का फासला।

रेलवे के आंकड़ों ने इस घटना की भयावहता को और गहरा दिया है। रात्रि 11:01 बजे 15050 गोरखपुर-कोलकाता पूर्वांचल एक्सप्रेस सिमुलतला स्टेशन से डाउन लाइन पर गुजरती है। रात्रि 11:02 बजे, सीमेंट लदी मालगाड़ी लहाबन स्टेशन से अप लाइन पर गुजरती है।

महज कुछ ही मिनटों के बाद, सिमुलतला से साढ़े तीन किलोमीटर और लहाबन से करीब साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी पर मालगाड़ी बेपटरी हो गई। उसके डब्बे डाउन लाइन को पूरी तरह बाधित कर चुके थे।

सोचिए, यदि पूर्वांचल एक्सप्रेस थोड़ी भी लेट होती या मालगाड़ी थोड़ी पहले वहां पहुंचती, तो हजारों जिंदगियां मलबे के ढेर में तब्दील हो जातीं।

एक बड़ी तबाही का संकेत…

जिस तरह से मालगाड़ी के भारी-भरकम डब्बे डाउन ट्रैक पर बिखरे पड़े हैं, उससे साफ है कि यह दुर्घटना एक बड़ी त्रासदी को निमंत्रण दे रही थी। सिमुलतला और लहाबन के बीच की 9 किलोमीटर की दूरी बीती रात ‘मौत के गलियारे’ में बदल गई थी।

इसे भगवान की असीम कृपा ही कहा जाएगा कि जब पटरियों पर हादसा हुआ, तब तक पूर्वांचल एक्सप्रेस सुरक्षित निकल चुकी थी। वरना शनिवार सुबह का सूरज हजारों परिवारों के लिए कभी न मिटने वाला अंधेरा लेकर आता।

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