पटना: बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार अब विधानसभा में अपनी ताकत साबित करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 24 अप्रैल को सदन में विश्वास मत पेश करेंगे। इसके लिए विधानसभा सचिवालय ने एक दिवसीय विशेष सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। राजनीतिक हलकों में इस फ्लोर टेस्ट को लेकर चर्चा तेज है, हालांकि आंकड़ों के आधार पर सरकार की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
विश्वास मत के लिए विशेष सत्र
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, 24 अप्रैल को सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही शुरू होगी। सभी विधायकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा बहुमत साबित करना है।
एनडीए का मजबूत संख्या बल
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत होती है, जबकि एनडीए के पास कुल 201 विधायकों का समर्थन है।
- भाजपा: 88 विधायक
- जदयू: 85 विधायक
- लोजपा (रामविलास): 19 विधायक
- हम: 5 विधायक
- आरएलएम: 4 विधायक
इस लिहाज से सरकार के सामने बहुमत साबित करना औपचारिकता भर माना जा रहा है।
विपक्ष की सीमित ताकत
वहीं, महागठबंधन के पास महज 35 विधायक ही बचे हैं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने विपक्ष की स्थिति को और कमजोर किया है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट में किसी बड़े उलटफेर की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।
कैबिनेट विस्तार पर नजरें
विश्वास मत के बाद कैबिनेट विस्तार का रास्ता साफ होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ दो उपमुख्यमंत्री—विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—ही सरकार चला रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मई के पहले सप्ताह में मंत्रिमंडल विस्तार संभव है। इसे लेकर खासकर छोटी सहयोगी पार्टियों के विधायकों में उत्सुकता और हलचल बढ़ी हुई है।
