मौत की सजा पर बोलीं शेख हसीना- ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित एक न्यायाधिकरण का फैसला

आईसीटी ने हसीना को कथित हिंसक दमन का “साजिशकर्ता और प्रमुख सूत्रधार” बताया

नई दिल्ली : बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी गैर-मौजूदगी में चले मुकदमे में एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने के बाद कहा कि यह फैसला ‘‘पूर्वाग्रह से ग्रसित एक न्यायाधिकरण” ने सुनाया है, जिसकी स्थापना एक ‘‘गैर-निर्वाचित और बगैर जनादेश वाली सरकार” ने की है।

बीते साल 5 अगस्त को बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ किए जाने के बाद से भारत में रह रही 78-वर्षीय नेता ने सख्त लहजे में दिए गए बयान में कहा कि न्यायाधिकरण का “राजनीति से प्रेरित” फैसला उनके और उनकी पार्टी आवामी लीग के खिलाफ “अंतरिम सरकार के भीतर चरमपंथी लोगों के निर्लज्ज व जानलेवा इरादे” को उजागर करता है।

देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा ‘‘मानवता के खिलाफ अपराध” के लिए सोमवार को उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने पर हसीना ने कहा कि आईसीटी में मेरे खिलाफ लगाए गए आरोपों का मैं पूरी तरह से खंडन करती हूं।”इससे पहले अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था।

महीनों तक चले मुकदमे के बाद अपने फैसले में आईसीटी ने हसीना को कथित हिंसक दमन का “साजिशकर्ता और प्रमुख सूत्रधार” बताया, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। वे पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित हैं। मृत्युदंड के घृणित फैसले से उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अंतरिम सरकार के भीतर किस प्रकार के चरमपंथी लोग हैं। उनके इरादे कितने बर्बर एवं जानलेवा हैं। ये लोग बांग्लादेश की अंतिम निर्वाचित प्रधानमंत्री को हटाना चाहते हैं और अवामी लीग की राजनीतिक ताकत को खत्म करना चाहते हैं। वह अपने खिलाफ “आरोप लगाने वालों” का सामना वैसे न्यायाधिकरण में करने से नहीं डरतीं, जहां साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन और परीक्षण किया जा सकता है। इसीलिए मैंने अंतरिम सरकार को बार-बार चुनौती दी है कि वह इन आरोपों को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के समक्ष ले जाए।

यह फैसला बांग्लादेश में संसदीय चुनावों से कुछ महीने पहले आया है। हसीना की अवामी लीग पार्टी को फरवरी में होने वाले चुनावों में भाग लेने से रोक दिया गया है। न्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस के “अराजक, हिंसक और सामाजिक रूप से प्रतिगामी” प्रशासन के तहत संघर्ष कर रहे लाखों बंग्लादेशियों को “उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने के इस प्रयास से बहकाया नहीं जा सकता”। वे देख सकते हैं कि तथाकथित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा किए गए मुकदमों का उद्देश्य कभी भी न्याय प्राप्त करना या जुलाई और अगस्त 2025 की घटनाओं के बारे में कोई वास्तविक जानकारी प्रदान करना नहीं था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय, उनका उद्देश्य अवामी लीग को “बलि का बकरा” बनाना, यूनुस और उनके मंत्रियों की विफलताओं से “दुनिया का ध्यान भटकाना” है। हसीना सरकार के पतन के बाद ढाका में यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला था। उन्होंने कहा कि उनके (यूनुस के) संरक्षण में सार्वजनिक सेवाएं चरमरा गई हैं। देश की अपराधों से जूझ रही सड़कों से पुलिस पीछे हट गई है और न्यायिक निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा है। अवामी लीग के समर्थकों पर हमले करने वालों को कोई सजा नहीं मिल रही है।

हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए जाते हैं और महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जाता है। प्रशासन के अंदर मौजूद इस्लामी चरमपंथी बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष सरकार की लंबी परंपरा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें हिज्ब-उत-तहरीर के लोग भी शामिल हैं।

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