दिल्ली ब्लास्ट : अल-फलाह के मैनेजिंग ट्रस्टी 9 कंपनियों से जुड़े हैं, 25 साल पहले एफआईआर में आया था नाम
दिल्ली : दिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी सुर्खियों में है। यह यूनिवर्सिटी हाल ही में कट्टरपंथी डॉक्टरों के एक मॉड्यूल की जांच के केंद्र में है। इस मॉड्यूल को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए धमाके के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस आतंकी साजिश से जुड़े तीन डॉक्टर उमर उन नबी, मुजम्मिल अहमद गनाई और शाहीन शाहिद इसी यूनिवर्सिटी में शिक्षक थे। उमर उस कार को चला रहा था जिसमें धमाका हुआ।
नौ कंपनियों से जुड़े हैं इस यूनिवर्सिटी के मैनेजिंग ट्रस्टी जावेद अहमद सिद्दीकी । कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि सिद्दीकी नौ फर्मों में डायरेक्टर हैं। इन कंपनियों का काम निवेश, शिक्षा, सॉफ्टवेयर से लेकर ऊर्जा, निर्यात और कंसल्टेंसी तक फैला हुआ है। जावेद अहमद सिद्दीकी, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं। यह ट्रस्ट फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर चलाता है।
एफआईआर में नाम
रिकॉर्ड के अनुसार सिद्दीकी का सबसे पुराना जुड़ाव अल-फलाह इन्वेस्टमेंट से है। वह 18 सितंबर, 1992 को इस कंपनी से जुड़े थे। वह अल-फलाह सॉफ्टवेयर, अल-फलाह एनर्जीज, तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन और अल-फलाह एजुकेशन सर्विस जैसी अन्य कंपनियों में भी शामिल हैं। अल-फलाह एजुकेशन सर्विस से वह 26 दिसंबर, 2023 को जुड़े थे। ज्यादातर कंपनियों का रजिस्टर्ड पता एक ही है: 274-ए, अल-फलाह हाउस, जामिया नगर, ओखला, नई दिल्ली। इसी बिल्डिंग से अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट भी चलता है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कैंपस 78 एकड़ में फैला है। इसकी शुरुआत साल 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में शुरू हुई थी। साल 2000 में सिद्दीकी और उनके भाई सऊद अहमद का नाम एक एफआईआर (नंबर 43/2000) में आया था। यह एफआईआर नई दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 और 409 (आपराधिक विश्वासघात), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (जालसाजी दस्तावेजों का धोखाधड़ी से उपयोग) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप लगाए गए थे।
हेराफेरी का आरोप
उन पर एक इन्वेस्टमेंट स्कीम में 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप था। शिकायतकर्ताओ में केआर सिंह भी थे, जिन्होंने दावा किया था कि उन्हें इस स्कीम के जरिए 95 लाख रुपये का चूना लगाया गया। इस स्कीम ने लोगों को कंपनियों के ग्रुप में पैसा जमा करने के लिए प्रेरित किया था, जिसे बाद में दस्तावेजों में हेरफेर करके शेयरों में बदल दिया गया। इस बारे में पूछे जाने पर, अल-फलाह के एक सूत्र ने बताया कि मामला बाद में खारिज कर दिया गया था।
इंदौर के एडिशनल एसपी रुपेश द्विवेदी ने बताया कि सिद्दीकी और उनका परिवार महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था। उनके पिता मोहम्मद हामिद सिद्दीकी महू के शहर काजी थे। द्विवेदी ने कहा, “हम उनके पुराने संपर्कों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।” अल-फलाह यूनिवर्सिटी के दिल्ली स्थित जामिया नगर के ऑफिस के अधिकारियों ने TOI को बताया कि दिल्ली धमाके में शामिल डॉक्टरों से उनका कोई संस्थागत संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी का हेड ऑफिस एक रिहायशी कॉम्प्लेक्स के अंदर एक बिल्डिंग की ग्राउंड फ्लोर पर स्थित है। एक शांत इलाके में स्थित यह परिसर ट्रस्ट की संपत्ति है।
