झारखंड के चाईबासा में आदिवासियों पर लाठीचार्ज शर्मनाक, भड़के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, सरकार पर बोला हमला


“क्या यही देखने के लिए अलग झारखंड राज्य बनाया गया था?” — चंपाई सोरेन


रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने पश्चिमी सिंहभूम के जिला मुख्यालय चाईबासा में “नो एंट्री” की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे आदिवासियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने की कोशिश की है, जो अमानवीय और निंदनीय है।

“नो एंट्री” की मांग को बताया जायज़, कार्रवाई को बताया तानाशाही भरा कदम
सोरेन ने कहा कि चाईबासा के ग्रामीण सिर्फ इतनी मांग कर रहे थे कि दिन में भारी वाहनों पर “नो एंट्री” लगाई जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने पूछा कि क्या इस राज्य में लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन का अधिकार नहीं है? क्या उनकी यह मांग गलत थी?

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले चलवाकर यह साबित कर दिया है कि वह जनता की आवाज़ दबाने पर तुली है।

सरकार आदिवासियों को सबसे आसान टारगेट समझ चुकी है”
चंपाई सोरेन ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने राज्य में आदिवासियों पर हुए कई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भोगनाडीह में वीर सिदो-कान्हू के वंशजों पर लाठीचार्ज, फिर गोड्डा में समाजसेवी सूर्या हांसदा का फर्जी एनकाउंटर, नगड़ी में किसानों पर लाठीचार्ज, और अब चाईबासा में आंदोलनरत आदिवासियों पर हमला… सरकार ने आदिवासियों को सबसे आसान निशाना बना लिया है।”

अबुआ सरकार का लॉलीपॉप दे रही, अधिकार छीन रही
पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्तमान महागठबंधन सरकार को “आदिवासी विरोधी” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार आदिवासियों को सिर्फ ‘अबुआ-अबुआ’ नामक लॉलीपॉप देकर बहला रही है, लेकिन जब हमारा समाज अपने अधिकारों के लिए खड़ा होता है, तो उसे बेरहमी से कुचल दिया जाता है।

सोरेन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि सन 1855 के हूल विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने भी आदिवासियों पर इस तरह के हमले नहीं किए थे, बल्कि उन्हें संथाल परगना और एसपीटी एक्ट जैसे अधिकार दिए थे।

सरना स्थल से लेकर नगड़ी की जमीन तक, सरकार कर रही अतिक्रमण
उन्होंने सिरमटोली में सरना स्थल पर हुए विवाद का ज़िक्र करते हुए कहा कि सरकार ने “विकास के नाम पर” जबरन अतिक्रमण किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहती तो रैंप को आगे या पीछे बढ़ा सकती थी, लेकिन उसने जानबूझकर धार्मिक स्थल से छेड़छाड़ की।

इसी तरह नगड़ी में आदिवासी किसानों की जमीन पर कब्जा करने के प्रयास का भी उन्होंने विरोध किया। उन्होंने कहा किजब हमने आवाज उठाई तो मुझे हाउस अरेस्ट किया गया, हजारों लोगों को रोका गया और किसानों पर लाठीचार्ज किया गया।”

संक्रमित रक्त चढ़ाने से बच्चों का जीवन बर्बाद
चंपाई सोरेन ने चाईबासा में संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि पांच बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया, जिससे उनका जीवन बर्बाद हो गया। सरकार ने इस ‘अपराध’ की कीमत मात्र दो लाख तय कर दी। इनमें ज्यादातर बच्चे आदिवासी समुदाय के हैं, लेकिन सरकार को शर्म नहीं आती।

अब राज्य की जनता एकजुट हो रही
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य की जनता सरकार के इस दमनकारी रवैये के खिलाफ एकजुट हो रही है। उन्होंने कहा कि जब भी आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों को कुचलने की कोशिश होगी, मैं सबसे आगे खड़ा रहूंगा।

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