बिहार विधानसभा चुनाव: भाजपा ने एपी सिंह का टिकट काटकर जमशेदपुर को दिया झटका, जदयू ने मुकेश को प्रत्याशी बनाकर बढ़ाया लौहनगरी का मान

राकेश

 जमशेदपुर :  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी अपने चरम पर है और टिकट वितरण को लेकर दलों के भीतर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

 इसी कड़ी में लौहनगरी जमशेदपुर से जुड़ी दो अहम राजनीतिक हस्तियों की स्थिति ने शहर के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

जहाँ एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जमशेदपुर से गहरे संबंध रखने वाले और आरा से  विधायक  अमरेंद्र प्रताप सिंह को टिकट न देकर अपने ही वरिष्ठ नेता को झटका दिया है, वहीं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने जमशेदपुर से जुड़े शुभानंद मुकेश को भागलपुर जिले की कहलगांव सीट से उम्मीदवार बनाकर शहर की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है।

भाजपा के पुराने सिपाही को किया दरकिनार

अमरेंद्र प्रताप सिंह का नाम बिहार और झारखंड—दोनों राज्यों की राजनीति में सम्मान के साथ लिया जाता है। जमशेदपुर में टेल्को आंदोलन से लेकर जनसंघ और फिर भाजपा के गठन तक, वे हमेशा अग्रणी भूमिका में रहे।

 जमशेदपुर जिला भाजपा के अध्यक्ष पद से लेकर बिहार विधानसभा में आरा सीट का प्रतिनिधित्व करने तक, उन्होंने लंबी राजनीतिक यात्रा तय की।

इस बार वे पुनः आरा से भाजपा टिकट के लिए प्रयासरत थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर किसी और को मैदान में उतार दिया। 

इससे न सिर्फ अमरेंद्र प्रताप सिंह के समर्थकों में नाराजगी है, बल्कि जमशेदपुर के उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों के बीच भी असंतोष है, जिन्होंने उन्हें शहर के प्रतिनिधि के रूप में देखा और सराहा।

जदयू ने शुभानंद मुकेश पर जताया भरोसा

वहीं दूसरी ओर जदयू ने एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश देते हुए शुभानंद मुकेश को कहलगांव से प्रत्याशी बनाया है।

 शुभानंद मुकेश न केवल बिहार के दिवंगत कद्दावर नेता और विधानसभा अध्यक्ष रहे सदानंद सिंह के पुत्र हैं, बल्कि उनका गहरा जुड़ाव जमशेदपुर से भी रहा है। 

वे वर्षों तक टाटा स्टील में अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे और उनकी पत्नी ने भी जमशेदपुर में डेंटिस्ट के रूप में सेवा दी है।

सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए शुभानंद मुकेश ने जमशेदपुर के लोगों के साथ आत्मीय संबंध बनाए। 

ऐसे में जदयू का उन्हें प्रत्याशी बनाना लौहनगरी के लिए गौरव की बात है।

राजनीतिक संदेश साफ है

एक ओर भाजपा अपने पुराने, समर्पित नेताओं की अनदेखी कर रही है, तो दूसरी ओर जदयू जैसे दल सामाजिक सरोकारों और क्षेत्रीय जुड़ाव को प्राथमिकता दे रहे हैं। 

जमशेदपुर के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ टिकट का सवाल नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण और कार्यकर्ताओं के सम्मान का भी विषय है।

अमरेंद्र प्रताप सिंह को टिकट न देना यह दिखाता है कि भाजपा अब पुराने ज़मीनी नेताओं की जगह नए चेहरों पर अधिक भरोसा कर रही है, भले ही उनका जनाधार उतना मजबूत न हो। 

वहीं सुभानंद मुकेश की उम्मीदवारी यह संकेत देती है कि जदयू नेतृत्व अपने निर्णयों में क्षेत्रीय जुड़ाव और सामाजिक पहचान को अहमियत देता है।

जमशेदपुर की पत्रकारिता में लंबे समय तक सक्रिय रहे और अभी राजधानी रांची से प्रकाशित दैनिक प्रातः नागपुरी के कार्यकारी संपादक शिवकुमार सिंह कहते हैं कि इस चुनावी मौसम में जमशेदपुर की राजनीतिक प्रतिष्ठा को एक ओर चोट लगी है, तो दूसरी ओर उसे सम्मान भी मिला है। 

भाजपा द्वारा अपने  विधायक और जमशेदपुर के सपूत अमरेंद्र प्रताप सिंह को टिकट न देना शहर के लिए निश्चित ही एक राजनीतिक झटका है।

 लेकिन जदयू द्वारा शुभानंद मुकेश को उम्मीदवार बनाकर लौहनगरी का मान बढ़ाया गया है। 

चुनावी नतीजे जो भी हों, लेकिन टिकट बंटवारे के इस दौर में जमशेदपुर की भूमिका बिहार चुनाव में एक बार फिर चर्चा में है।

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