राज्य सरकार और टाटा स्टील को मिला था जवाब दाखिल करने का आदेश
1988 से चल रहा जमशेदपुर वासियों को भी तीसरे मताधिकार का मामला
जमशेदपुर : जमशेदपुर में भी निर्वाचित निकाय की मांग को लेकर दायर मामले की सुप्रीम कोर्ट में एक बार पुन: सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। इस केस का सीरियल नंबर 27 तथा 27.1 है। इसकी सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस बागची की अदालत करेगी। इस मामले के तीन पक्ष हैं। याचिका दायर करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा, राज्य सरकार और टाटा स्टील।
इससे पूर्व हुई सुनवाई में राज्य सरकार और टाटा स्टील को अपना-अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया था। हालांकि शर्मा का दावा है कि अब तक टाटा स्टील तथा झारखंड सरकार ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। सिर्फ टाटा स्टील ने पिछले कई वर्षों के दस्तावेजों का संकलन फाइल किया है, जबकि यह तारीख ढ़ाई महीने के बाद पड़ी है। उनका आरोप है कि ऐसा कोर्ट को भ्रमित करने के लिए किया गया है। उनके अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी सरकार या राजनीतिक दल जमशेदपुर के लोगों को तीसरा मताधिकार देना ही नहीं चाहती है। सभी की नजर लीज समझौते की तरफ ही है।
दरअसल 1988 से यह मामला चल रहा है। तब शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में पहली बार जमशेदपुर वासियों को भी तीसरा मताधिकार दिये जाने मांग को लेकर याचिका दायर की थी। हालांकि बाद में इसमें नगर निगम बनाम औद्योगिक नगर का मामला जुड़ गया, क्योंकि राज्य सरकार ने 29 दिसंबर, 2023 को पूरे जमशेदपुर अक्षेस क्षेत्र को औद्योगिक शहर बनाने की अधिसूचना जारी कर दी थी।
