जमशेदपुर : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित घाटशिला विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तिथि की घोषणा आज सोमवार 6 अक्टूबर को हो सकती है।
नई दिल्ली में होने वाली चुनाव आयोग की प्रेस वार्ता का सभी को इंतजार है, जिसमें बिहार विधानसभा चुनावों के साथ-साथ झारखंड के इस प्रमुख सीट पर उपचुनाव की घोषणा की संभावना जताई जा रही है।
जैसे ही घोषणा होगी, आदर्श आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। इसे लेकर यह स्पष्ट नहीं है कि संहिता पूरे जिले में लागू होगी या सिर्फ घाटशिला क्षेत्र में — इस पर स्थिति आज साफ हो सकती है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
घाटशिला विधानसभा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की एक आदिवासी बहुल और संवेदनशील सीट है।
यह क्षेत्र सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से हमेशा सक्रिय रहा है। इस सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की परंपरा रही है।
2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से झामुमो के रामदास सोरेन ने जीत दर्ज की थी।
उनके निधन के कारण यह उपचुनाव अनिवार्य हुआ है। रामदास सोरेन को क्षेत्र में एक मजबूत आदिवासी नेता के रूप में देखा जाता था, जिनका स्थानीय मुद्दों पर पकड़ मजबूत थी।
संभावित प्रत्याशी व समीकरण
रामदास सोरेन के निधन के बाद झामुमो
उनके बड़े बेटे या किसी परिजन या भरोसेमंद स्थानीय चेहरे को मैदान में उतार सकता है। पार्टी सहानुभूति लहर पर भरोसा कर रही है। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन मजबूत दावेदार हैं जिन्होंने पिछला चुनाव भाजपा टिकट पर लड़ा था । वैसे भाजपा के भीतर कई दूसरे नेता भी टिकट की रेस में शामिल हैं।
इस विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों की बात करें तो क्षेत्र में बेरोज़गारी, शिक्षा, आदिवासी भूमि सुरक्षा, और सड़क-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याएं अभी भी प्रमुख हैं। साथ ही, घाटशिला एक खनिज संपन्न क्षेत्र होने के बावजूद विकास की मुख्यधारा से अपेक्षित रूप से जुड़ नहीं पाया है — यह मुद्दा भी केंद्र में रहेगा।
राजनीति के गलियारे में माना जा रहा है की घाटशिला उपचुनाव न सिर्फ एक सीट का चुनाव है, बल्कि यह इस क्षेत्र के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला मौका भी है। सभी राजनीतिक दलों की निगाहें इस पर टिकी हैं, और जैसे ही चुनाव आयोग तिथि घोषित करेगा, पूरा क्षेत्र चुनावी रंग में रंग जाएगा।
