चाईबासा : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में सक्रिय भाकपा (माओवादी) संगठन के 10 कुख्यात नक्सलियों ने गुरुवार को पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
छह पुरुष, चार महिलाएं, करोड़ों के इनामी नक्सली
आत्मसमर्पण करने वालों में छह पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। सभी नक्सली एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा उर्फ सागर और पतिराम मांझी उर्फ अनल के दस्ते से जुड़े थे।
इन नक्सलियों की पहचान रांदो बोर्डपाई, गार्दी कोड़ा, जोहन पूर्ति, निरसो सीदु, घोनोर देवगम, गौमेया कोड़ा, केरा कोड़ा, कैरी कायम, सावित्री गोप और प्रदीप सिंह के रूप में हुई है।
मुख्यधारा में लौटने का लिया संकल्प
चाईबासा स्थित पुलिस लाइन में आयोजित आत्मसमर्पण समारोह में सभी नक्सलियों ने हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने और समाज की सेवा करने का संकल्प लिया।
इस पहल को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस-सीआरपीएफ के सघन अभियानों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
जो हथियार डालेगा, उसे मौका मिलेगा: DGP
इस अवसर पर DGP अनुराग गुप्ता ने कहा कि झारखंड की आत्मसमर्पण नीति देश की सर्वश्रेष्ठ नीतियों में से एक है। जो नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें नई जिंदगी का अवसर मिलेगा। लेकिन जो हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य पुलिस के पास नक्सलियों की गतिविधियों का पूरा डाटा मौजूद है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
आत्मसमर्पण कार्यक्रम में सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह, आईजी अभियान माइकल एस. राज, आईजी एसटीएफ अनूप बिरथरे, डीआईजी कोल्हान अनुरंजन किसफोट्टा, और चाईबासा एसपी अमित रेणु सहित कई वरिष्ठ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारी मौजूद रहे।
लातेहार में भी हुई थी आत्मसमर्पण की बड़ी कार्रवाई
इससे पहले 1 सितंबर को लातेहार जिले में झारखंड जनमुक्ति परिषद (JJMP) के नौ उग्रवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया था।
इनमें से चार उग्रवादियों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि एक पर 3 लाख का इनाम था। आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने पांच एके-47 राइफलों सहित भारी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद पुलिस को सौंपे थे।
मार्च 2026 तक झारखंड को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने मार्च 2026 तक राज्य को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है।
इसी वर्ष अब तक 31 नक्सली विभिन्न मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं, और कई ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता अपनाया है।
