अमेरिका के H-1B फैसले पर भड़के राजीव मिश्रा, सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेता बोले- यह कदम भारतीय परिवारों और आईटी क्षेत्र के लिए विनाशकारी
मुख्य बिंदु:
- राजीव मिश्रा ने नए H-1B शुल्क को बताया अमानवीय
- केंद्र से त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की
- परिवारों और आईटी कंपनियों को गंभीर संकट का अंदेशा
जमशेदपुर – कांग्रेस प्रवक्ता राजीव मिश्रा ने अमेरिका के नए H-1B नियमों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उनका कहना है कि अचानक लागू किए गए इस निर्णय ने भारतवंशियों को असुरक्षा में धकेल दिया है। दूसरी ओर, भारतीय आईटी उद्योग को भी गहरे झटके का सामना करना पड़ेगा।
मिश्रा ने कहा कि $100,000 का अतिरिक्त शुल्क न सिर्फ़ कंपनियों के लिए असहनीय है, बल्कि परिवारों के लिए भी संकटपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य योजनाएँ और पारिवारिक जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।
वैसे, उनका मानना है कि छोटे और मध्यम सेवा प्रदाता सबसे अधिक प्रभावित होंगे। परियोजनाएँ बाधित होंगी और रोजगार घटेगा। मिश्रा ने चेतावनी दी कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “हम अमेरिका के इस अचानक और करारात्मक तौर पर लागू किए गए कदम की कड़ी निंदा करते हैं। यह न सिर्फ़ परिवारों के जीवन में अनिश्चितता और कष्ट लाएगा, बल्कि आईटी-उद्योग और हमारे गांव-शहरों की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचाएगा।”
राजीव मिश्रा ने केंद्र सरकार से तत्काल उच्चस्तरीय वार्ता शुरू करने की मांग की। उनके अनुसार, प्रभावित श्रमिकों और परिवारों को राहत और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना ज़रूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की नीतिगत बदलावों से पहले भारत से द्विपक्षीय चर्चा होनी चाहिए। “यह केवल विदेशी नीति का विषय नहीं है, बल्कि सीधे लोगों के जीवन से जुड़ा है,” उन्होंने जोड़ा।
मिश्रा ने ज़ोर देकर कहा कि कांग्रेस संगठन प्रभावित समुदायों के साथ खड़ा है। वे आश्वस्त करते हैं कि पार्टी हर स्तर पर आवाज़ उठाएगी और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक यह मुद्दा पहुँचाएगी।

