जमशेदपुर: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में कांग्रेस पार्टी को नए सिरे से चुस्त दुरुस्त करते हुए तेज तर्रार संगठन के रूप में तैयार करने की हो रही कवायद के बीच नए जिला अध्यक्ष के चयन की
पहल भी तेज है.
इस बीच खुद को ब्राह्मणों की प्रतिनिधि संस्था के रूप में प्रस्तुत करने वाले परशुराम परिवार की भी कांग्रेसियों की इस जोर आजमाइश में नाटकीय अंदाज में एंट्री हो गई है.
शनिवार को सुबह 10:00 बजे के करीब स्थानीय सर्किट हाउस में जमशेदपुर के ब्राह्मण चेहरा बनने के लिए, अपनी पुलिस से सेवा से रिटायरमेंट के बाद, सक्रिय कमल किशोर परशुराम परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों नकुल तिवारी, डीके मिश्रा, हरेंद्र मिश्रा,अजय ओझा आदि के साथ पहुंचे और कांग्रेस के जिला पर्यवेक्षक सह गुजरात के विधायक अनंत पटेल से मिले.
उस समय वहां पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी के हैवीवेट प्रदीप बालमुचू के अलावा कई अन्य नेता ( अध्यक्ष पद के दावेदार)भी मौजूद थे.
बताया जाता है किकमल किशोर ने कांग्रेस पर्यवेक्षक को जिले, खासकर जमशेदपुर, में उनके संगठन की जमीनी स्थिति, कांग्रेस से ब्राह्मणों के जुड़ाव और शहर में ब्राह्मणों के निर्णायक वोट बैंक होने के बारे में विस्तृत जानकारी दी. लगे हाथ यह भी बताया कि जमशेदपुर में किसी ब्राह्मण को कांग्रेस के अध्यक्ष क्यों बनाया जाना चाहिए और ऐसा नहीं करने पर कांग्रेस को किस तरह का सियासी नुकसान उठाना पड़ सकता है?
वैसे तो अध्यक्ष पद की दौड़ में कांग्रेस के कई ब्राह्मण नेता शामिल हैं. इनमें से कुछ पुराने भी हैं तो कुछ नए भी. कुछ आरंभ से ही कांग्रेस में रह गए हैं और अंतिम समय तक अब इसी संगठन में बने रहने का संकल्प भी ले चुके हैं तो दूसरी और कुछ ऐसे भी नेता हैं जो दूसरे दलों से अनुभव लेकर इस समय अपने अनुभव की जलधारा से खुद को और पार्टी को संतृप्त कर रहे हैं.
सर्किट हाउस में उस समय मौजूद कई कांग्रेस नेता सहसा अवाक की स्थिति में आ गए जब कमल किशोर समेत अन्य ब्राह्मण नेताओं ने वर्तमान तेज तर्रार अध्यक्ष और फौजी पृष्ठभूमि से आने वाले आनंद बिहारी दुबे के लिए जोरदार पैरवी करनी शुरू कर दी.
कमल किशोर समेत में ब्राह्मण नेताओं का तर्क था कि आनंद बिहारी दुबे के पास वह सबकुछ है जो कांग्रेस के लिए जरूरी है. मसलन वे तेज तर्रार हैं. संसाधन जुटाना में माहिर हैं. ब्राह्मण समाज में भी पकड़ रखते हैं. दूसरे समुदाय में भी प्रिय हैं. झामुमो में रहने का भी अनुभव है. अध्यक्ष रहते इन्होंने कांग्रेस में जान फूक दी है और जिस तरह से बिष्टुपुर स्थित जिला कांग्रेस मुख्यालय तिलक पुस्तकालय के करीब 100 साल पुराने भवन का कायाकल्प किया है उसी तरह आने वाले समय में वे जमशेदपुर में कांग्रेस को इतना मजबूत कर देंगे कि 1985 के बाद जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में एक अदद जीत के लिए तरस रही इस पार्टी को जीत नसीब हो जाएगी.
सर्किट हाउस में जब कमल किशोर
क्लास में किसी शिक्षक की तरह खड़े रहकर अपनी उंगली के इशारे से अपनी बातों को रख रहे थे उनके बॉडी लैंग्वेज पर ही सबकी नजर टिक गई थी.
हर कोई अपने अंदाज से इसका विश्लेषण भी कर रहा था. किसी को उनके भीतर का पूर्व पुलिसिया विभाग दिख रहा था तो किसी को उनके भीतर एक काबिल वकील की संभावना नजर आ रही थी.
