भाजपा को जमशेदपुर पूर्व से पूर्णिमा दास साहू पर उम्मीदें हैं
पूर्व सीएम की बहू का लक्ष्य प्रमुख लड़ाई में भाजपा के गढ़ को दोबारा हासिल करना है
प्रमुख बिंदु:
पूर्णिमा दास साहू महत्वपूर्ण जमशेदपुर पूर्वी सीट से चुनाव लड़ेंगी
• भाजपा 2019 में हारे हुए निर्वाचन क्षेत्र को फिर से हासिल करना चाहती है
• उम्मीदवार 1967 के बाद से जमशेदपुर से दूसरी महिला विधायक हो सकती हैं
जमशेदपुर – भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास की बहू पूर्णिमा दास साहू को जमशेदपुर पूर्व विधानसभा सीट पर दोबारा कब्जा करने के लिए कड़ी चुनौती दी है।
पूर्णिमा दास साहू जमशेदपुर पूर्वी सीट से भाजपा की पसंद बनकर उभरी हैं।
कभी भाजपा का गढ़ रही यह सीट 2019 के उलटफेर में हार गई।
अब ओडिशा के राज्यपाल रघुबर दास ने उनकी उम्मीदवारी पर अपनी राजनीतिक पूंजी दांव पर लगा दी है।
पूर्णिमा ने पार्टी के कई दिग्गजों को पछाड़ते हुए कई लोगों को आश्चर्यचकित करते हुए टिकट हासिल किया।
1967 के बाद वह जमशेदपुर से दूसरी महिला विधायक बन सकीं।
पहली थीं प्रियंका चोपड़ा की दादी ज्योत्सना अखौरी।
पूर्णिमा ने उन पर भरोसा जताने के लिए पार्टी नेताओं का आभार व्यक्त किया।
उनका लक्ष्य महिलाओं और बच्चों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।
वहीं, रघुवर दास इससे पहले इस सीट से लगातार पांच बार जीत चुके हैं.
2019 में निर्दलीय उम्मीदवार सरयू रॉय से उनकी हार ने स्थानीय राजनीतिक गतिशीलता को बदल दिया।
भाजपा अब जमशेदपुर में अपने पांच साल के सूखे को दूर करना चाहती है।
एनडीए और भाजपा नेता पूर्णिमा की जीत सुनिश्चित करने की क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं।
उनकी जीत संभावित रूप से क्षेत्र के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दे सकती है।
चुनाव परिणाम 23 नवंबर को घोषित किये जायेंगे।
पूर्णिमा का अभियान पूरे राज्य में खासा ध्यान खींच रहा है।
इस दौड़ का नतीजा जमशेदपुर में राजनीतिक इतिहास बना या बिगाड़ सकता है।
