दौड़ने के क्रम में युवाओं की मौत, ये कैसा फिटनेस
सरकारी नौकरी के लिए जान लगा देने की जिद में झारखंड में गयीं १५ जानें
झारखंड में पुलिस भर्ती के दौरान दौड़ में शामिल अभ्यर्थियों की मौतें चिंता का विषय बन गई हैं, और संदेह है कि इनमें से कई दवाओं के सेवन और खराब शारीरिक तैयारी के कारण मौत के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, संभव है कुछ अभ्यर्थी बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्तेजक दवाओं का उपयोग कर रहे हों, जिससे शायद उनकी शारीरिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। सरकारी नौकरी के लिए इतनी लंबी दौड़ में शामिल होना कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

झारखंड में उत्पाद आबकारी सिपाही की बहाली के लिए बीते २२ अगस्त से राज्य के विभिन्न केंद्रों पर चल रही दौड़ के क्रम में अब तक 15 अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है।
शारीरिक जांच परीक्षा में सैकड़ों अभ्यर्थी बेहोश होकर अस्पताल पहुंच गए और अभी जगह-जगह इलाजरत हैं। सबसे ज्यादा पलामू से, फिर हजारीबाग, गिरिडीह, पूर्वी सिंहभूम समेत राज्य के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थियों की दौड़ के क्रम में दम फूलने और हृदय गति रुक जाने के कारण मौत की बात सामने आई है।
अस्पताल में इलाजरत कुछ अभ्यर्थियों ने इलाज कर रहे मेडिकल स्टाफ पर हमले की कोशिश भी की। डॉक्टर बता रहे हैं कि अभ्यर्थियों का हिंसक व्यवहार देखते हुए ऐसी आशंका है कि उन्होंने उत्तेजक दवाएं ली हैं। बीमार होकर अस्पताल आने वाले अभ्यर्थियों में से अधिकांश का ब्लड प्रेशर डाउन पाया गया। उन्हें काफी पसीना आ रहा था और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।
ऑक्सीजन लेवल भी बहुत कम था। वहीं कुछ अभ्यर्थी कोमा में चले गए थे। डॉक्टर का कहना है कि बीमार और बेहोश हुए अभ्यर्थियों के हाव-भाव और व्यवहार देखने से ऐसा लगता है कि इन लोगों ने अपना प्रदर्शन बेहतर करने के लिए क्षमता बढ़ाने वाली स्टेरॉयड जैसी उत्तेजक दवा, इंजेक्शन या फिर एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल किया है जिसका उनके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ा।
कुछ अभ्यर्थियों ने एनर्जी ड्रिंक लेने की बात स्वीकार भी की है। वहीं तेज धूप और उमस में घंटा लाइन में खड़े रहने और दौड़ने को भी कुछ लोग मौत की वजह बता दे रहे हैं।
जिन अभ्यर्थियों की दौड़ के क्रम में मौत हुई है उनके शव का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। बिसरा जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत की वास्तविक वजह क्या थी। कारणों की पड़ताल के लिए डॉक्टरों की टीम बना दी गई है।
भर्ती दौड़ के दौरान अभ्यर्थियों की मौत और बेहोशी के मामलों पर संज्ञान लेते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नया आदेश जारी किया और दौड़ का समय बदलकर सुबह 4:00 बजे से कर दिया गया ताकि अभ्यर्थियों को दौड़ के समय तेज धूप का सामना नहीं करना पड़े। अब सुबह 4:00 बजे से 9:00 के बीच ही सभी केंद्रों पर दौड़ हो रही है, पहले यह दौड़ सुबह 6:30 बजे से 11:30 तक हो रही थी। समय बदल देने के बाद भी दौड़ के क्रम में अभ्यर्थियों का मौत का सिलसिला थमा नहीं है।
सिपाही बहाली के लिए गठित बोर्ड के अध्यक्ष कमांडेंट मुकेश कुमार ने कहा कि भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के दवा सेवन करने की बहुत हद तक संभावना है। बेहोश होने वाले अभ्यर्थी अपना नाम पता तक भूल जा रहे हैं। बहाली स्थल के बाहर पुलिस द्वारा आसपास की दुकानों में छापेमारी की जा रही है ताकि कहीं वहां कोई power enhancement drugs तो नहीं बिक रही।
जमशेदपुर के जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि हृदय गति रुक जाने का एक कारण Hypertrophic cardiomyopathy (HCM) हो सकता है। HCM एक आनुवांशिक बीमारी है जिसके कारण हृदय की मांसपेशियाँ मोटी हो जाती हैं, जिससे हृदय के लिए रक्त पंप करना कठिन हो जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त लोग यदि दौड़ते हैं या तेज कसरत में शामिल होते हैं तो उनकी हृदय गति अनियमित हो कर बहुत ज्यादा तेज हो सकती है और दिल धड़कने की यह असामान्य दर मौत का कारण बन सकती है। डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि दूसरी वजह Long QT syndrome है। लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम एक ऐसी समस्या है जिसमें आपके हृदय की विद्युत प्रणाली को रिचार्ज होने में बहुत अधिक समय लगता है। यह समस्या जीवन के लिए ख़तरनाक प्रकार की असामान्य हृदय गति को जन्म दे सकती है। लोगों को Long QT syndrome विरासत में मिल सकता है या प्राप्त हो सकता है।
डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि तीसरी वजह अभ्यास पर्याप्त न होने के बावजूद 10 किलोमीटर की दौड़ एक बार में पूरी करने की जिद है। सरकारी नौकरी पाने के लिए जान लगा देने की जिद जान ले लेगी, यह बात ये युवा समझ नहीं रहे और फिर जान से हाथ धो बैठते हैं।
डॉ गुप्ता ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि बहाली की दौड़ में शामिल होने के लिए घंटों लाइन में इंतजार करने के बाद जब ये प्रतिभागी रेस की लेन में खड़े होते हैं तो कई बार डिहाइड्रेशन के शिकार हो चुके होते हैं। यह डिहाइड्रेटेड शरीर उतनी लंबी दौड़ के लिए तैयार नहीं रहता, फिर तेज दौड़ने से सांस खिंचने लगती है और अंततः यह जानलेवा हो जाती है।
डॉ गुप्ता बताते हैं कि शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए अनाबॉलिक स्टेरॉयड इंजेक्शन या दवा के रूप में लेने से खून का थक्का बन सकता है और यह थक्का अगर फेफड़ों में फंस जाता है तो व्यक्ति की जान जा सकती है। कहीं हमारे युवा शॉर्टकट के चक्कर में यही उपाय तो नहीं अपना रहे। मोबाइल फोन और डिजिटल लाइफ के प्रति अत्यधिक आसक्ति ने युवाओं की शारीरिक गतिविधियां लगभग बंद कर दी हैं और नतीजा सामने है।
ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि ऐसी बहाली दौड़ का आयोजन सालों से होता रहा है। पहले यह दौड़ चिलचिलाती धूप में हुआ करती थी। तब तो दौड़ने के क्रम में मौत का एक भी मामला कभी सामने नहीं आया था। युवाओं और अभिभावकों दोनों को इस पर सोचना होगा। फास्ट फूड और खराब जीवन शैली के दायरे से बाहर आना होगा। आखिर इन्हीं युवाओं की बदौलत तो भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना देख रहा है।

