फरार आरोपी का पता लगाने में विफल रहने पर कारण बताओ नोटिस जारी
दो संदिग्धों की जमानत रद्द कर दी गई, क्योंकि स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अदालती आदेशों का पालन न करने के लिए जांच का सामना करना पड़ रहा है।
जमशेदपुर – साइबर अपराध की विशेष अदालत ने न्यायपालिका और स्थानीय कानून प्रवर्तन के बीच बढ़ती दरार को उजागर करते हुए मानगो थाने के प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अदालत की यह कार्रवाई साइबर अपराध में दो फरार आरोपियों के बारे में सूचना देने में पुलिस थाने की बार-बार विफलता के बाद आई है। अपराध मामला।
न्यायाधीश आभास वर्मा ने कहा, “संचार की यह कमी अस्वीकार्य है।” “यह न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालती है और हमारी प्रणाली में जनता के विश्वास को कम करती है।”
मामले की पृष्ठभूमि
बिहार के गया निवासी आरोपी सुधाकर कुमार और पवन कुमार को झारखंड उच्च न्यायालय ने सशर्त जमानत दे दी।
उन्हें हर महीने पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना था, लेकिन वे अनुपस्थित रहे।
अदालत ने सूचना के लिए कई अनुरोध भेजे थे, जिनमें 5 जुलाई और 8 मई, 2024 को भेजे गए पत्र भी शामिल थे, जिनका कोई उत्तर नहीं मिला।
कानूनीपरिणाम
न्यायाधीश वर्मा ने पुलिस थाना प्रभारी को संचार में हुई चूक के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
दोनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी गई है।
2022 में दायर मूल मामले में धोखाधड़ी और साइबर अपराध के आरोप शामिल हैं अपराध एटीएम कार्ड स्वैप योजना से संबंधित है।
यह घटना साइबर अपराधों के अभियोजन में चुनौतियों और न्याय प्रणाली के विभिन्न अंगों के बीच सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है।
