रेलवे की जमीन के विवाद में आरपीएफ की भूमिका से त्रस्त आकार आत्मदाह करने वाले टाटानगर के रेलकर्मी की इलाज के दौरान मौत
जमशेदपुर : टाटानगर में बागबेड़ा ट्राफिक कॉलोनी में रेलवे की जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ पर परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए खुद को आग लगा लेने वाले रेलवे कर्मचारी सुनील कुमार पिल्लई ने टाटा मुख्य अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. 28 जून को हुई इस घटना के बाद
पिल्लई टीएमएच की बर्न यूनिट में भर्ती थे.
बताया जाता है कि 28 जून बुधवार को बागबेड़ा रेलवे ट्रैफिक कॉलोनी में रेलवे की एक जमीन पर कारोबारी ओमपकाश कसेरा की ओर से कब्जा किया जा रहा था. पहले इस जमीन पर सुनील के परिवार का कब्जा था. इसीलिए वे लंबे समय से अपने हक की आवाज उठा रहे थे और कसेरा द्वारा कब्जा करने को अवैध कदम बताते हुए आरपीएफ से हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे थे इस बाबत उन्होंने रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी जानकारी देने की बात कही थी.
कहीं से राहत नहीं मिलने के कारण सुनील पिल्लई बहुत आहत थे., 28 जून को जब उक्त जमीन पर कब्जा किया जाने लगा तो उन्होंने विरोध करते हुए आरपीएफ से हस्तक्षेप की गुहार लगाई. कई घंटे तक आरपीएफ की ओर से काम को नहीं रुकवाया गया तो सुनीलने सार्वजनिक रूप से आरपीएफ पर इस अवैध कब्जे में मदद करने का आरोप लगाते हुए इसके विरोध में खुद को आग लगा ली.
आरपीफ द्वारा जमीन पर कब्जा दिलाने के दौरान पहले सुनील पिल्लई की पत्नी और बेटी ने भी आत्मदाह का प्रयास किया था.
हर किसी को हतप्रभ कर देने वाली इस घटना के तुरंत बाद सुनील को रेलवे अस्पताल ले जाया गया जहां पर बेहतर इलाज के लिए उन्हें टीएमएच रेफर कर दिया गया. मकड़ी 60% तक जल गए थे.
बताया जाता है कि मरने से पहले सुनील ने एक वीडियाे जारी किया जिसमें वे आरपीएफ पर खुद काे प्रताडित करने का आराेप लगाते दिख रहे हैं. वीडियो में वे कहते हैं कि आरपीएफ और लैंड डिपार्टमेंट को ओमप्रकाश द्वारा पैसे खिलाकर काम करवाया जा रहा है.आरपीएफ उन्हें और उनके परिवार को परेशान कर रही है. इसकी शिकायत ट्वीट के माध्यम में रेल मंत्री और रेल मंत्रालय के अलावा डीआरएम को भी की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.. तंग आकर उन्होंने खुद को आग लगा ली थी.
सुनील के परिवार का दावा है कि सुनील पिल्लई के पिता रामनाथ पिल्ले ने रेलवे की जमीन लीज पर ली थी. पिता के निधन के बाद पिता के नाम पर जमीन थी. साल 2011 में उक्त जमीन को कब्जा कर ओम प्रकाश नामक व्यक्ति को बेच दिया गया. इसको लेकर पिता ने साल 2021 में केस भी फाइल किया है.
ओम प्रकाश अक्सर उक्त जमीन पर निर्माण कार्य करवाने का प्रयास करता रहा, पर कोर्ट में केस चलने के कारण वह काम नहीं करवा पा रहा था.
28 जून को आरपीएफ रेलवे के कुछ अधिकारियों की मौजूदगी में उस जमीन पर निर्माण कार्य करा रहा था अभी सुनील पिलाई वहां पहुंचे और जमीन पर निर्माण कार्य का विरोध करने लगे.
जब निर्माण कार्य नहीं रोका गया तब सुनील ने खुद को आग लगा ली.
