राजनगर में एनएचएम स्वास्थ्य कर्मियों ने बकाया वेतन और मानदेय को लेकर दिया धरना, जताया आक्रोश, चेतावनी दी

राजनगर : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत अनुबंधित एवं आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों को पिछले तीन से चार माह से वेतन और मानदेय का भुगतान नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान में लगातार हो रही देरी से कर्मचारियों और उनके परिवारों के समक्ष भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इसी मुद्दे को लेकर पूर्वी सिंहभूम जिले के स्वास्थ्य कर्मियों ने शुक्रवार को एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन कर सरकार और विभागीय अधिकारियों से लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने की मांग की।

धरना पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि वे सीमित वेतन पर स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की पढ़ाई, बैंक ऋण की ईएमआई, घरेलू खर्च और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करना कठिन हो गया है।

कई कर्मचारियों पर स्थानीय दुकानों का उधार बढ़ता जा रहा है, जबकि आर्थिक तंगी के कारण कुछ लोग मानसिक तनाव से भी गुजर रहे हैं।

कर्मियों का कहना है कि वे राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर मानदेय नहीं मिलने से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की बात करती है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारियों को ही समय पर वेतन नहीं मिल रहा है।

तकनीकी खामियों का भुगत रहे खामियाजा

स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि विभाग द्वारा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था लागू की जा रही है, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण भुगतान प्रक्रिया बाधित हो गई है।

इस संबंध में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है।

विभागीय पत्र के अनुसार, राज्य में एसएनए-स्पर्श प्लेटफॉर्म के माध्यम से डीबीटी भुगतान व्यवस्था अभी पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाई है। आवश्यक डेटा पीएफएमएस में दर्ज होने के बावजूद तकनीकी त्रुटियों के कारण भुगतान अटक रहा है।

समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार वित्त विभाग, तकनीकी टीमों और पीएफएमएस प्रभाग के साथ लगातार समन्वय कर रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

15,500 एनएचएम कर्मचारी व 42,500 आशा कार्यकर्ता परेशान

झारखंड सरकार के अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि राज्य के लगभग 15,500 एनएचएम कर्मचारी और 42,500 आशा कार्यकर्ता का भुगतान प्रभावित हो रहा है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वेतन और पारिश्रमिक कर्मचारियों का कानूनी रूप से संरक्षित अधिकार है तथा भुगतान में देरी उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए तकनीकी समस्याओं के समाधान तक लंबित वेतन, मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान अकाउंट बेस्ड सिस्टम के माध्यम से करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मियों को अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है।

स्वास्थ्य कर्मियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

धरना पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द लंबित वेतन और मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर भुगतान में देरी न की जाए और अकाउंट बेस्ड सिस्टम के माध्यम से तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

कर्मियों ने कहा कि वे कोरोना काल से लेकर आज तक लगातार जनता की सेवा में लगे हुए हैं। इसलिए उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।

उनका कहना है कि समय पर वेतन भुगतान नहीं होने से न केवल कर्मचारियों का जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सरकार की ओर से अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि भुगतान कब होगा।

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