निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार बोले- विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संतुलन उनकी शैक्षणिक सफलता और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण आधार
गम्हरिया : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में मंगलवार को डॉ. जेएलएचसी-212 में “विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण” विषय पर फैकल्टी अपग्रेडेशन प्रोग्राम के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य एनआईटी संस्थानों में छात्र मार्गदर्शन, भावनात्मक स्वास्थ्य, काउंसलिंग सहायता एवं सकारात्मक परिसर वातावरण को सुदृढ़ बनाना है।
कार्यक्रम संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के नेतृत्व में आयोजित हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संतुलन उनकी शैक्षणिक सफलता और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को मार्गदर्शक एवं संरक्षक बताते हुए कहा कि सकारात्मक, समावेशी और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में फैकल्टी की अहम जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने कहा कि संस्थानों को विद्यार्थियों के समग्र विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए काउंसलिंग प्रणाली, सकारात्मक परिसर संस्कृति तथा छात्र सहभागिता गतिविधियों को लगातार मजबूत करना चाहिए।
कार्यक्रम का पहला सत्र “फैकल्टी के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता” विषय पर केंद्रित रहा। उद्घाटन सत्र में वक्ता सुश्री सागरिका घोष जे ने विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भावनात्मक बुद्धिमत्ता, फैकल्टी कल्याण तथा सहानुभूतिपूर्ण और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. सरोज कुमार सारंगी, डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) एवं रजिस्ट्रार (प्रभारी), तथा प्रो. दिलीप कुमार यादव, डीन (फैकल्टी वेलफेयर) की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुमारी नम्रता एवं डॉ. शक्तिवेल एस. थे। समन्वयकों में डॉ. विजय कुमार डल्ला, डॉ. कुनाल सिंह, डॉ. संगीता कुमारी और डॉ. पौलामी माजी शामिल रहे, जबकि श्री अजिताभ गौतम एवं श्रीमती पुष्पा बाला महतो सह-समन्वयक के रूप में उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपनिदेशक प्रो. आरवी शर्मा सहित संस्थान के सभी डीन, विभागाध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
