जमशेदपुर में श्रद्धांजलि सभा में कैलाश चंद्र खुराना के सामाजिक योगदान को किया गया यादगार स्मरण

“सेवा को जिसने बनाया जीवन का उद्देश्य, वह आज भी समाज की प्रेरणा हैं”


जमशेदपुर। चाकुलिया के साथ-साथ जमशेदपुर के भी सुप्रसिद्ध समाजसेवी कैलाश चंद्र खुराना की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा रविवार को साकची स्थित अग्रसेन भवन के सभागार में अत्यंत भावुक और श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण में सम्पन्न हुई।

इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, परिजन और शुभचिंतक एकत्र हुए और स्व. खुराना के सामाजिक योगदान, मानवीय मूल्यों और धार्मिक आस्था को गहन श्रद्धांजलि अर्पित की।

सेवा, सरलता व समाज के लिए समर्पण का उदाहरण थे कैलाश खुराना


सभा के दौरान वक्ताओं ने स्व. कैलाश चंद्र खुराना के जीवन का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें “जनसेवा का प्रतीक” बताया। वे न केवल जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे, बल्कि हर वर्ग के व्यक्ति के सुख-दुख में सहभागी बनकर समाज में समरसता का संदेश देते रहे।

उनके मित्र और पुराने सहयोगी चन्द्र देव सिंह ‘राकेश’ ने अपने उद्गार में बताया कि मेरा और खुराना जी का नाता 50 वर्षों से भी अधिक पुराना है। चाकुलिया से लेकर जमशेदपुर तक, हमने अनेक सामाजिक कार्यों में साथ-साथ काम किया। वे हमेशा कहते थे कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उनका जीवन इसी आदर्श पर आधारित था।

प्रसिद्ध जनों की उपस्थिति और श्रद्धांजलि
सभा में शहर के प्रमुख समाजसेवी और प्रतिष्ठित परिवारों की उपस्थिति देखी गई।
रवि झुनझुनवाला, उर्वशी सेठी, सेकसरिया परिवार, हैप्पी खुराना सहित बड़ी संख्या में लोगों ने स्व. खुराना के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।

धार्मिक प्रवृत्ति व सामाजिक सौहार्द का संगम
स्व. खुराना न केवल सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे, बल्कि धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। उनका जीवन आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ा था और उन्होंने सदैव धर्म को एक निजी आस्था नहीं, बल्कि समाज के कल्याण का माध्यम माना। गुरुद्वारा, मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थाओं से उनका गहरा जुड़ाव रहा।

स्मृति में रहेंगे हमेशा जीवित


सभा के समापन पर एक स्वर में यह बात उभरी कि कैलाश चंद्र खुराना भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सरल जीवन, सेवा भाव, और सामाजिक सरोकार समाज के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
उनके विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर लोगों ने उन्हें अंतिम नमन अर्पित किया। कहा गया की ऐसे कैलाश चंद्र खुराना जैसा व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं जो बिना किसी अपेक्षा के समाज के लिए जीते हैं। कैलाश खुराना का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धांजलि उनके कार्यों को आगे बढ़ाना ही है।

परिवारजनों की उपस्थिति व भावुक क्षण
कार्यक्रम में स्व. खुराना के परिजनों की उपस्थिति ने माहौल को और भी आत्मीय बना दिया।
बसंत लाल खुराना, हैप्पी खुराना, ललित खुराना, पंकज खुराना, किशलय खुराना, कुनाल खुराना, राम अवतार गुलाटी, जसबीर सिंह, जगजीत सिंह, गुरुद्वारा प्रधान, जगदीश गुलाटी, राजू गुलाटी, बिनोद कुमार, अनिता गुलाटी सहित अन्य परिवारजन श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहे। कई ने अपने व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए स्व. खुराना के स्नेहपूर्ण स्वभाव और मार्गदर्शन को याद किया।

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