पश्चिम बंगाल: पूर्व मंत्री ने ईडी की गिरफ्तारी को दी चुनौती, कलकत्ता हाई कोर्ट में 29 मई को सुनवाई

कोलकाता, 28 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ का रुख किया।

उन्होंने इस महीने की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा राज्य में करोड़ों रुपए के नगरपालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।

इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ के समक्ष होनी है।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार तृणमूल कांग्रेस के विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में हार गए थे।

विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने के सात दिन बाद, 11 मई की रात को लगभग 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद, ईडी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

गुरुवार को उनके वकील ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इस मामले में पहली सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय है।

ईडी ने 11 मई की रात को गिरफ्तार करने से पहले बोस से कई बार पूछताछ की थी।

राज्य विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें कई बार समन भेजा गया था। हालांकि, सुजीत बोस ने अपने व्यस्त चुनावी प्रचार कार्यक्रम का हवाला देते हुए ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया था।

नतीजे घोषित होने के बाद वह दो बार ईडी के सामने पेश हुए और 11 मई को दूसरी बार पेश होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वह फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं।

उन पर मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने उत्तर 24 परगना स्थित दक्षिण दमदम नगरपालिका में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश नकद के बदले की थी।

ईडी के अनुसार, सुजीत बोस ने कथित तौर पर 150 अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश करके भारी रकम कमाई। गिरफ्तारी से पहले, ईडी अधिकारियों ने सुजीत बोस के दफ्तरों और आवास पर भी छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया था। एजेंसी ने पूर्व मंत्री और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की भी जांच की।

ईडी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि सुजीत बोस के स्वामित्व वाले एक रेस्तरां ने 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान करोड़ों रुपए कमाए, जबकि उस समय आउटलेट का संचालन पूरी तरह से बंद था। ईडी के वकील ने कोलकाता की एक विशेष ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम’ (पीएमएलए) अदालत को यह भी बताया कि लॉकडाउन के दौरान रेस्टोरेंट के खाते में 1.1 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के अलावा, सुजीत बोस के निजी खाते में भी 2.2 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।

वीकेयूडीएससी

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