सेंदरा पर्व पर वन विभाग और समिति आमने-सामने
गदड़ा बैठक में शिकार परंपरा और कानून को लेकर टकराव
मुख्य बिंदु:
- वन विभाग ने शिकार न करने की सख्त अपील की
- दलमा राजा ने परंपरा जारी रखने की बात कही
- 27 अप्रैल को दलमा में सेंदरा पर्व आयोजित होगा
जमशेदपुर – गदड़ा में सेंदरा पर्व को लेकर बैठक में परंपरा और कानून के बीच मतभेद खुलकर सामने आए।
जमशेदपुर के परसुडीह स्थित गदड़ा में सोमवार को अहम बैठक हुई। इसमें वन विभाग और दलमा बुरू सेंदरा समिति आमने-सामने दिखे।
हालांकि बैठक दलमा राजा राकेश हेंब्रम के आवास पर आयोजित हुई। यहां शिकार पर्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए।
वन विभाग ने स्पष्ट अपील रखी। उन्होंने कहा कि सेंदरा के दौरान शिकार न किया जाए।
दूसरी ओर विभाग ने परंपरा निभाने की अनुमति दी। लेकिन कानून का पालन जरूरी बताया गया।
रेंजर दिनेश चंद्र ने संतुलन की बात कही। उन्होंने परंपरा और प्रकृति दोनों को जरूरी बताया।
हालांकि विभाग ने आधुनिक हथियारों पर रोक की बात कही। जाल और बंदूक के इस्तेमाल से बचने को कहा गया।
दूसरी ओर दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि शिकार परंपरा पुरानी है।
उधर उन्होंने कहा कि इसे रोका नहीं जा सकता। यह आस्था से जुड़ा विषय बताया गया।
उन्होंने वन विभाग से मांग रखी। रास्ते में रोक-टोक न करने को कहा गया।
हालांकि चेकनाका हटाने की भी मांग की गई। शिकारियों को परेशान न करने की बात कही गई।
दूसरी ओर तलहटी में सुविधाएं देने की मांग रखी गई। वहां जुटने वाले लोगों के लिए व्यवस्था जरूरी बताई गई।
उन्होंने चेतावनी भी दी। कहा कि रोकने पर विरोध किया जाएगा।
उधर बताया गया कि हजारों लोग शामिल होते हैं। यह पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि तिथि तय हो चुकी है। 27 अप्रैल को दलमा में पर्व होगा।
हालांकि 25 अप्रैल को दलमा राजा गदड़ा से रवाना होंगे। फदलोगोड़ा में सभी लोग जुटेंगे।
वहीं पूजा के बाद सेंदरा की शुरुआत होगी। देवी-देवताओं की आराधना की जाएगी।
कुल मिलाकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। परंपरा और कानून में टकराव जारी है।


