बार-बार सूचित किए जाने के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, बाल-बाल बचे बच्चे

कक्षा में मौजूद थे 28 बच्चे, तीन बच्चे घायल, प्राथमिक उपचार के बाद भेजा गया घर

सरायकेला खरसावां जिले के खापरसाई प्राथमिक विद्यालय का मामला

जर्जर भवन की सूचना शिक्षा विभाग को देने के बाद नहीं हुई कोई कार्रवाई

सरायकेला : पश्चिम सिंहभूम स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के बाद अब शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन कटघरे में है। बार-बार सूचना देने के बाद भी जिला प्रशासन नहीं जागा और बाल-बाल बचे बच्चे।

जी हां, सरायकेला खरसावां जिले के खापरसाई प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। हालांकि इस घटना ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की गंभीर लापरवाही की पोल खोलकर रख दी.

जानकारी के अनुसार जर्जर स्कूल भवन का बाहरी छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा. उस समय स्कूल में कुल 28 बच्चे मौजूद थे. गनीमत रही कि मध्यान्न भोजन की घंटी बजते ही बच्चे क्लासरूम से बाहर निकल चुके थे. अगर कुछ मिनट की भी देरी होती तो बड़ा हादसा तय था.

वैसे इस घटना में 11 वर्षीय मुस्कान बारला, 9 वर्षीय रेशमी बारला और 7 वर्षीय सोनाली जामुदा घायल हो गईं. सभी को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया. हादसे के बाद बच्चों में दहशत का माहौल है. बच्चे अब क्लासरूम के अंदर जाने से डर रहे हैं.

मिड-डे मील के बाद बच्चों को स्कूल के बाहर पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाया गया. शिक्षिका भी दरी बिछाकर खुले में पढ़ाती नजर आईं. ग्रामीणों के मुताबिक यह स्कूल भवन करीब 38 से 40 साल पुराना है. वर्ष 1985 में बने इस दो कमरे के भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है.

बरसात में छत टपकती है, दीवारों से प्लास्टर गिरता रहता है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद बच्चों को इसी खतरनाक भवन में पढ़ाई करने को मजबूर किया जा रहा है.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रेणु कुमारी पंडा ने 6 सितंबर 2025 को ही विभाग को पत्र लिखकर भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी दी थी. उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग भी की थी.

इसके बावजूद विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की. हादसे के 24 घंटे बाद तक भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. बताया जा रहा है कि सूचना देने के बावजूद प्रभारी बीपीओ सांत्वना जेना देर से पहुंची जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.

अब सवाल उठता है कि क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि चेतावनी के बावजूद भी प्रशासन नहीं जागता ? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी ? फिलहाल खापरसाई स्कूल के बच्चे आज भी जर्जर भवन के साए में पढ़ने को मजबूर हैं और अभिभावकों में डर के साथ- साथ प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा भी है. वैसे आपको जानकर हैरानी होगी कि घटना के 24 घंटा बीत जाने के बाद घटना की जानकारी जिले के उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को नहीं है जो साफ दर्शाता है कि शिक्षा विभाग का निचला तंत्र कितना लापरवाह है. वैसे इंडिया न्यूज़ वायरल द्वारा संज्ञान में दिए जाने के बाद जिले के उपायुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से पूरी रिपोर्ट तलब की है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस लापरवाही की जिम्मेवारी कौन लेता है। समय रहते यदि स्कूल की मरम्मत या उसे किसी दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया तो भविष्य में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।

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