लालू यादव अब अपने निजी आवास में जाने वाले हैं, 48 वर्ष पहले यहीं था ठिकाना

पटना : अब लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी सरकारी आवास छोड़कर अपने निजी घर में जाने वाले हैं। उनके जीवन के संघर्ष और राजनीति की डगर को उनके आवास के साथ जोड़कर देखें तो वे वहीं पहुंच रहे हैं जहां से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। लालू यादव और राबड़ी देवी अब वेटेरिनरी कॉलेज के पास उसी निजी घर में रहेंगे जहां वे 48 साल पहले रहते थे।

समय का पहिया घूमता है तो इंसान अक्सर उसी स्थान पर पहुंच जाता है जहां से वह चला था। बिहार के दिग्गज नेता लालू यादव को भी समय का पहिया वहीं पहुंचाने जा रहा है, जहां से उन्होंने अपना संघर्ष और अपनी राजनीति शुरू की थी। लालू यादव पिछले दो दशकों से अपने परिवार के साथ पटना के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड में रह रहे थे। उनको अब यह आवास छोड़ना है। बिहार के पूर्व मख्यमंत्री लालू यादव और उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अब किसी अन्य सरकारी आवास में जाने के बजाय अपने निजी घर में रहना चाहते हैं। उनका निजी आवास पटना के महुआ बाग में बन रहा है। इस महलनुमा विशाल बंगले का निर्माण पूरा होने में अभी कुछ वक्त और लगेगा इसलिए फिलहाल लालू का परिवार पटना के वेटेरिनरी कॉलेज कैंपस के पीछे स्थित अपने पुराने निजी भवन में रहेगा।


लालू यादव का वेटेरिनरी कॉलेज से पुराना रिश्ता

लालू यादव का पटना के वेटेरिनरी कॉलेज से बहुत पुराना रिश्ता है। बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया में जन्मे लालू यादव ने अपने गांव में ही प्रारंभिक शिक्षा ली थी। इसके बाद 1960 के दशक और 1970 के दशक के पूर्वार्द्ध में वे पटना में पढ़ रहे थे। पटना में उन्होंने पहले एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। बाद में पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ते रहे। इस दौरान वे अपने बड़े भाई, जो कि वेटरेनिरी कॉलेज में चपरासी थे, के साथ उनके कॉलेज परिसर में स्थित सरकारी आवास में रहते थे। यही वह जगह है जहां रहते हुए लालू यादव का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ था। इससे पहले लालू फुलवरिया गांव में अपने माता-पिता के साथ एक झोपड़ी में रहते थे।

सर्वेंट क्वार्टर में रहते हुए सियासत की राह पकड़ी

लालू यादव ने पटना यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की और इसी दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। आवास वही वेटेरिनरी कॉलेज वाला बना रहा। छात्र राजनीति के दौरान ही वे बिहार छात्र संघ के महासचिव चुने गए थे और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। वह वर्ष 1970 था, जब सिर्फ 22 साल के लालू यादव के चर्चे बिहार के राजनीतिक जगत में होने लगे थे। इसी दौर में लालू यादव ने वेटेरिनरी कॉलेज में क्लर्क के रूप में नौकरी शुरू कर दी। नौकरी के दौरान भी वे अपने भाई के सर्वेंट क्वार्टर में ही रहते रहे।

सन 1977 से सरकारी भवन बने रहे आशियाना

लालू यादव की सन 1973 में राबड़ी देवी से शादी हुई थी। इसके बाद वे वेटेरिनरी कॉलेज के पास अपने आवास में रहने लगे थे। इसी आवास में उनके पुत्र-पुत्रियों के जन्म हुए। जेपी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले लालू यादव सन 1977 में आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में वे 29 साल की उम्र में सांसद बन गए। वे सन 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पटना का प्रसिद्ध सरकारी आवास 1, अणे मार्ग आवंटित हुआ। वे कई सालों तक इस आवास में रहे। बाद में जब लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं, तब भी आवास यही बना रहा, क्योंकि यह मुख्यमंत्री के लिए तय भवन है।

अब सरकारी आवास से हुआ मोहभंग

बाद में राबड़ी देवी को सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड मिला। लालू यादव का परिवार इसी आवास में अब तक रह रहा है। लेकिन दो दशक बाद इस परिवार को अपना यह सरकारी आवास त्यागना पड़ रहा है। हालांकि लालू और रबड़ी देवी को एक अन्य सरकारी आवास आवंटित किया गया, लेकिन वे उसमें नहीं जाना चाहते हैं। लालू और राबड़ी अपना शेष बुढ़ापा अपने निजी घर में ही बिताना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री आवास और जेल की कोठरी

सन 1977 से करीब 48 साल बाद लालू यादव का परिवार सरकारी आवास के बजाय निजी आवास में रहेगा। यह पटना के वेटनरी कॉलेज कैंपस के पीछे स्थित उनका वही पुराना निजी घर है जहां रहते हुए लालू यादव ने सरकारी नौकरी की, जहां उनका परिवार बना, जहां उन्होंने संघर्ष किए और राजनीति की सीढ़ियां चढ़ीं।

सरकारी आवासों में रहते हुए लालू यादव पर चारा घोटाला, आईआरसीटीसी घोटाला जैसे कई मामलों में भ्रष्टाचार के दाग लगे। लालू ने सत्ता के शिखर देखे तो जेल की कोठरियां भी देखीं। गांव की झोपड़ी, वेटेरिनरी कॉलेज का सर्वेंट क्वार्टर, वेटेरिनरी कॉलेज परिसर के पीछे का निजी घर, दिल्ली का सांसद आवास, दिल्ली का रेल मंत्री का बंगला, पटना में बिहार के मुख्यमंत्री का बंगला और फिर सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला..लालू को कहां क्या मिला? समय का पहिया घूमा और वे उसी वेटेरिनरी कॉलेज के पास वापस पहुंच गए जहां से राजनीति की डगर पर उन्होंने चलना शुरू किया था।

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