बिहार में ‘पीला पंजा’ मुहिम तेज, चलने लगा बुलडोजर

पटना : अब यूपी की तर्ज पर बिहार में भी चल रहा बुलडोजर। राजधानी पटना से लेकर पूर्णिया, गया, आरा, मुजफ्फरपुर और नालंदा तक उन लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है जो सार्वजनिक सड़कों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। प्रशासनिक अधिकारी पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और मोतिहारी सहित राज्य की विभिन्न जेलों में भी छापेमारी कर रहे हैं।

बिहार में सुशासन और कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रशासन ने इन दिनों ‘पीला पंजा’ मुहिम को तेज कर दिया है। ये कार्रवाई उन भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के लिए किसी कहर से कम नहीं है, जिन्होंने सरकारी जमीनों और सड़कों पर अवैध कब्जा कर रखा था। प्रशासनिक सख्ती का आलम ये है कि राजधानी पटना से लेकर पूर्णिया, गया, आरा, मुजफ्फरपुर और नालंदा जैसे दूर-दराज के जिलों तक बुलडोजर लगातार गरज रहे हैं। इसे आमलोग ‘सम्राट एक्शन’ का नाम दे रहे हैं। प्रशासन का साफ संदेश है कि बिहार की सड़कों को जागीर समझने वालों की अब खैर नहीं।

सड़क को जागीर समझने वालों पर ‘पीले पंजे’ का कहर

ये विशेष अभियान मुख्य रूप से उन अवैध ढांचों को ध्वस्त करने पर केंद्रित है, जो सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण करके बनाए गए हैं। जिलाधिकारियों के निर्देश पर प्रशासन इन अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है। बुलडोजर एक्शन में कई प्रमुख शहरों के व्यापारिक और रिहायशी इलाकों को कवर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक सभी प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कर दिया जाता।

पटना से पूर्णिया तक जबर्दस्त बुलडोजर एक्शन

अतिक्रमण हटाने का ये अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे राज्य को अपनी जद में ले लिया है। पटना में जहां वीआईपी रोड्स पर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया, वहीं पूर्णिया और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में भी प्रमुख बाजारों और चौराहों पर प्रशासन ने कड़ा रुख दिखाया। इसके अलावा, गया, आरा और नालंदा में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई है।

जेलों की सुरक्षा पर फोकस, एक साथ छापेमारी

बुलडोजर कार्रवाई के साथ ही, राज्य प्रशासन ने आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए जेलों के अंदर भी सख्ती दिखाई है। पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और मोतिहारी सहित राज्य की कई प्रमुख जेलों में अचानक छापेमारी की गई। इस दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने एक-एक बैरक को खंगाल डाला। छापेमारी का उद्देश्य जेल के अंदर से संचालित होने वाले आपराधिक सिंडिकेट को तोड़ना, मोबाइल फोन और अन्य अवैध वस्तुओं की बरामदगी करना था। प्रशासन ने दावा किया कि इस एक्शन से जेलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति और मजबूत होगी।

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