आदिवासियों पर अत्याचार के खिलाफ बोले चंपाई सोरेन, 29 अक्टूबर को ‘कोल्हान बंद’ की घोषणा
- भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर लगाया आदिवासी विरोधी होने का आरोप
रांची/ जमशेदपुर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासियों के खिलाफ लगातार हो रहे अत्याचार का आरोप लगाते हुए 29 अक्टूबर को कोल्हान बंद की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह बंद आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा” के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कोल्हान बंद की घोषणा एक्स पर की है।

सोरेन ने कहा कि हाल के दिनों में राज्य में जिस तरह आदिवासियों पर लाठीचार्ज, फर्जी मुकदमे और पुलिसिया कार्रवाई की घटनाएँ हुई हैं, वह बेहद चिंताजनक है।
झारखंड की तथाकथित ‘अबुआ सरकार’ आदिवासियों और मूलवासियों की आवाज़ को कुचलने का काम कर रही है। जब भी हमारा समाज अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ा होता है, सरकार दमन पर उतर आती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चाईबासा, नगड़ी और गोड्डा जैसी घटनाएँ इस बात का उदाहरण हैं कि सरकार आदिवासियों को टारगेट बना रही है।
चंपई सोरेन ने कहा कि 29 अक्टूबर को कोल्हान बंद शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। यह बंद किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान और हक की लड़ाई के लिए है। हम चाहते हैं कि सरकार अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे और आदिवासी समाज के साथ हो रहे अन्याय को रोके।
उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, किसान समूहों और युवाओं से बंद को सफल बनाने की अपील की है।
पृष्ठभूमि — चाईबासा में पुलिस कार्रवाई बनी वजह
हाल ही में चाईबासा में “नो एंट्री” की मांग को लेकर आदिवासी समुदाय द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस घटना के बाद पूरे कोल्हान क्षेत्र में नाराजगी फैल गई।
सोरेन ने कहा कि आंदोलनकारियों पर बर्बर कार्रवाई इस सरकार की मानसिकता को दर्शाती है।जो सरकार अपने ही लोगों पर लाठी चलवाए, वह जनता की सरकार नहीं रह जाती।
भाजपा नेताओं का समर्थन, प्रशासन सतर्क
सूत्रों के अनुसार, भाजपा की कोल्हान इकाई ने भी बंद के समर्थन में बैठक की है और सभी कार्यकर्ताओं से इसे सफल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
वहीं, प्रशासन ने 29 अक्टूबर के कोल्हान बंद को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। पुलिस बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
