जमशेदपुर में संभव संस्था ने बुजुर्गों संग मनाई भावनाओं से ओतप्रोत दीपावली
जमशेदपुर। जहाँ एक ओर शहर जगमगाते दीयों और रंग-बिरंगे पटाखों से दीपावली मना रहा था, वहीं संभव संस्था ने इस त्योहार को एक खास अंदाज़ में मनाकर एक मिसाल पेश की। संस्था ने बाराद्वारी स्थित आशीर्वाद ओल्ड एज होम में बुजुर्गों के साथ दीपावली का पर्व प्रेम, अपनापन और मानवीय संवेदना के साथ मनाया।

दीप जलाए, फुलझड़ियाँ छोड़ीं व बाँटीं मिठाइयाँ
कार्यक्रम की शुरुआत बुजुर्गों के साथ दीये जलाकर और फुलझड़ियाँ छोड़कर की गई।
संस्था के सदस्य पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ बुजुर्गों के साथ शामिल हुए। मिठाइयों का वितरण कर उनके मीठे पलों में और मिठास घोली गई।
बुजुर्गों के चेहरों पर खिलती मुस्कुराहटें इस आयोजन की सफलता की गवाही दे रही थीं।
गर्म कपड़ों का वितरण: ठंड में राहत की पहल
चूँकि ठंड का मौसम धीरे-धीरे दस्तक दे रहा है, इसलिए संभव संस्था ने बुजुर्गों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए गर्म कपड़ों का वितरण भी किया।
ऊनी शॉल, स्वेटर और कंबल जैसी वस्तुएँ उन्हें भेंट की गईं ताकि वे सर्दी के मौसम में सुरक्षित और आरामदायक रह सकें।
बुजुर्गों की खुशी ही हमारी असली दीपावली: भरत सिंह
संस्था के मुख्य संरक्षक श्री भरत सिंह ने इस मौके पर कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं।
उनके साथ समय बिताना और उनके चेहरे पर खुशी लाना ही असली दीपावली है।
हमारे इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ त्योहार मनाना नहीं, बल्कि उन्हें यह एहसास दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं।”
हर वर्ग तक पहुँचती रहे खुशियाँ : सारिका सिंह
संस्था की अध्यक्ष सारिका सिंह ने कहा कि संभव संस्था हमेशा समाज के हर वर्ग तक खुशियाँ पहुँचाने का प्रयास करती है।
दीपावली प्रेम और अपनापन बाँटने का पर्व है। बुजुर्गों के साथ यह उत्सव मना कर हमें अपार संतोष और ऊर्जा मिलती है।
संस्था के सदस्यों ने दी खुशियों की सौगात
इस आयोजन को सफल बनाने में संस्था के मुख्य संरक्षक भरत सिंह, अध्यक्ष सारिका सिंह, उपाध्यक्ष अंजुला सिंह, सुचित्रा रुंगटा, राजेश सिंह, रश्मि राज और रीपा दत्ता सहित सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दीपों की रोशनी और बुजुर्गों की मुस्कुराहट ने इस दीपावली को एक सार्थक और अविस्मरणीय उत्सव बना दिया।
वास्तव में संभव संस्था का यह आयोजन बताता है कि दीपावली केवल घरों को सजाने का नहीं, बल्कि दिलों को रौशन करने का पर्व है।
बुजुर्गों के साथ बिताया गया यह समय हर किसी के लिए यादगार रहा — एक ऐसी दीपावली, जहाँ रौशनी के साथ भावनाओं ने भी अपनी गहराई दिखाई।
