ऑनलाइन ठगी, हैकिंग व साइबर बुलिंग से बचाव के उपायों पर जमशेदपुर में मिला मार्गदर्शन
==साइबर सतर्कता की ओर कदम, डीबीएमएस कदमा हाई स्कूल में हुआ जागरूकता सेशन
जमशेदपुर : डी.बी.एम.एस. कदमा हाई स्कूल के कलाकृति सभागार में शुक्रवार को साइबर क्राइम जागरूकता सेशन का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को साइबर अपराध, ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग और इंटरनेट सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की सचिव अनीता रामकृष्णा द्वारा अतिथियों को पौध भेंट कर स्वागत करते हुए की गई। उन्होंने कहा कि आज के समय में डिजिटल सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी शारीरिक सुरक्षा। इस प्रकार की पहल से समाज को जागरूक बनाना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने बताए जरूरी उपाय
इस दो घंटे के जागरूकता सत्र का संचालन साइबर पीस फाउंडेशन की विशेषज्ञ आस्था तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अभिभावकों की सतर्क निगरानी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गोपनीय जानकारी साझा करने से बचना, स्ट्रॉन्ग पासवर्ड का उपयोग, और दोस्तों की सूची की सतत समीक्षा जैसे छोटे-छोटे उपाय बच्चों और परिवार को साइबर अपराध से बचा सकते हैं।

आस्था तिवारी ने यह भी बताया कि कैसे नकली ईमेल, लिंक या ऐप्स के ज़रिए ठग लोगों की निजी जानकारी चुरा लेते हैं, जिससे बैंकिंग फ्रॉड, डेटा चोरी और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं होती हैं।
साइबर पुलिस की मौजूदगी, साझा किए वास्तविक केस
इस जागरूकता सत्र की खास बात थी साइबर थाना बिष्टुपुर के थाना प्रभारी श्रीनिवास कुमार तथा निरीक्षक कुणाल की उपस्थिति।
उन्होंने जमशेदपुर और झारखंड के अन्य हिस्सों में घटित वास्तविक साइबर अपराधों का उदाहरण देकर बताया कि आमतौर पर लोगों की लापरवाही और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर अपराधी अपने मंसूबे पूरे करते हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की शिकायत तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर दर्ज की जानी चाहिए, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होती है।
तारक दास (साइबर पीस फाउंडेशन) ने अभिभावकों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि बच्चों को साइबर जागरूक बनाना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी अभिभावकों और शिक्षकों का खुद जागरूक रहना है।
शिक्षकों, अभिभावकों ने की सराहना
कार्यक्रम में डी.बी.एम.एस. संस्था की सचिव अनीता रामकृष्णा, संयुक्त सचिव उषा मालिनी, प्रधानाचार्या गुरप्रीत भामरा, उप प्रधानाचार्या सुपर्णा राय, शिक्षिका एस. शीरीन, विद्यालय शिक्षकगण और सैकड़ों की संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।
अभिभावकों ने कहा कि यह सत्र उनकी आंखें खोलने वाला रहा। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को फोन देना जितना आसान है, उन्हें सुरक्षित रखना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो गया है।
अंत में विद्यालय की सचिव अनीता रामकृष्णा ने सभी अतिथियों को उपहार प्रदान कर धन्यवाद ज्ञापन किया और कार्यक्रम का समापन किया।
