झारखंड के सारंडा में फिर नक्सली वार: मार्च से अब तक तीन शहीद, नौ घायल; सुरक्षा अभियान पर गंभीर सवाल

जमशेदपुर/रांची: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों की बढ़ती आक्रामकता और सुरक्षा बलों पर बार-बार हो रहे हमले ने एक बार फिर राज्य और केंद्र सरकार की नक्सल विरोधी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार को जराईकेला थाना क्षेत्र के सामठा गांव में हुए आईईडी ब्लास्ट में एक बार फिर सुरक्षा बलों को नुकसान उठाना पड़ा, जिसमें सीआरपीएफ 60वीं बटालियन के एक अधिकारी शहीद हो गए जबकि दो अन्य घायल हो गए हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ जब भाकपा (माओवादी) संगठन द्वारा घोषित “प्रतिशोध सप्ताह (Revenge Week)” चल रहा है।

मार्च से अक्टूबर: तीन शहादतें, नौ घायल
जानकारी के मुताबिक, सिर्फ मार्च 2025 से अक्टूबर तक के दौरान सारंडा के विभिन्न हिस्सों में हुए नक्सली हमलों में तीन जवान शहीद हो चुके हैं, जबकि नौ अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

22 मार्च 2025: सारंडा के छोटा नागपुर इलाके में आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह शहीद हुए थे।
12 अप्रैल 2025: दूसरे हमले में झारखंड जगुआर के जवान सुनील धन की जान चली गई।
11 अक्टूबर 2025: शुक्रवार को हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के महेंद्र लश्कर शहीद हो गए।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि नक्सली लगातार घात लगाकर हमले कर रहे हैं और सुरक्षा बलों की चाक-चौबंद घेराबंदी के बावजूद वे मौके तलाशने में कामयाब हो रहे हैं।

सारंडा की भौगोलिक संरचना बन रही चुनौती
सारंडा, भारत का सबसे बड़ा साल का जंगल, लगभग 850 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और यह पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा से लेकर ओडिशा सीमा तक फैला हुआ है।

यहां की भौगोलिक बनावट — घना जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़, सीमित संचार व्यवस्था और संकरे रास्ते — नक्सलियों को छिपने और तेजी से मूवमेंट करने का फायदा देती है, जबकि सुरक्षा बलों को अभियान चलाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

ऑपरेशन तेज, पर खतरा बरकरार
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राज्य पुलिस, सीआरपीएफ और जगुआर की टीमें लगातार सारंडा को नक्सल मुक्त बनाने के लिए ऑपरेशन चला रही हैं, लेकिन नक्सलियों की रणनीतिक वापसी और विस्फोटक हमले इस लड़ाई को और कठिन बना रहे हैं।

लगातार बढ़ रहा नक्सली दुस्साहस

“प्रतिशोध सप्ताह” के नाम पर किए गए इस हमले ने यह साफ कर दिया है कि नक्सली अब भी संगठित हैं, और उनके पास आईईडी और विस्फोटक तैयार करने की तकनीक व संसाधन उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण इलाकों में नक्सलियों की सहानुभूति और खुफिया सूचना नेटवर्क सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।


Join Our Newsletter

यह भी पढ़ें

NATIONAL HIGHWAY पर ओवरलोडिंग पर सख्ती : 2 से 4 गुना तक जुर्माना, 15 अप्रैल से नया नियम लागू

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए नियम...

टाटा स्टील में राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस पर वीरों को श्रद्धांजलि, सुरक्षा जागरूकता सप्ताह का शुभारंभ

जमशेदपुर : जमशेदपुर में टाटा स्टील ने राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस के अवसर पर वीर अग्निशमन कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 14 से...

अभिमत

ज़िद

ज़िद है आगे बढ़ने की,सबको पीछे छोड़करनया इतिहास गढ़ने की। ज़िद है मज़बूत बनने की,हर मुश्किल का सामना करने की,गिरकर भी हौसला बनाए रखने की। ज़िद...

जमशेदपुर में विंटर फेस्ट के तहत “जैम एट स्ट्रीट” बना आकर्षण का केंद्र, कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही बटोरी

जमशेदपुर : जमशेदपुर के विंटर फेस्ट के तहत "जैम एट स्ट्रीट" (Jam@Street) एक बड़ा आकर्षण बना, जहाँ बिस्टुपुर की सड़कों पर संगीत, नृत्य, योग,...

संपादक की पसंद

सरायकेला-चाकुलिया में चड़क पूजा की धूम : आस्था, परंपरा और कठिन तपस्या का अद्भुत संगम

सरायकेला / चाकुलिया : सरायकेला के भुरकुली गांव और चाकुलिया के सिमदी गांव में आयोजित चड़क पूजा एक बार फिर श्रद्धा, साहस और परंपरा...

टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन रोइंग अकादमी ने इंडोर रोइंग चैम्पियनशिप 2026 में चौथा राष्ट्रीय पदक जीतकर रचा इतिहास

जमशेदपुर 2026: टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) रोइंग अकादमी ने अपने छोटे से सफर में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए कटक में आयोजित...

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत