चक्रधरपुर: दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में शुक्रवार को एक यथार्थवादी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य ट्रेन दुर्घटना के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की जांच करना था।
इस अभ्यास में रेलवे और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
दुर्घटना का सायरन बजते ही हरकत में आया रेलवे तंत्र
मॉक ड्रिल के तहत चक्रधरपुर यार्ड में दो बोगियों के टकराने और उनके क्षतिग्रस्त होने की काल्पनिक दुर्घटना रची गई।
घटना की सूचना मिलते ही दुर्घटना सूचक सायरन बजा, और महज चार मिनट के भीतर चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया, मंडल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके मिश्रा, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए।
NDRF व रेलवे विभागों का समन्वित रेस्क्यू ऑपरेशन
इस मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन की टीम ने भाग लिया, जिन्होंने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर फंसे यात्रियों को निकालने, प्राथमिक चिकित्सा देने और सुरक्षित निकासी जैसी कार्यवाहियों का अभ्यास किया।
इसके साथ ही रेलवे के सुरक्षा विभाग, स्काउट्स एंड गाइड्स, आरपीएफ, संत जॉन्स एम्बुलेंस सेवा, और अन्य विभागों ने भी अत्यधिक समर्पण और तत्परता का प्रदर्शन किया।
एम्बुलेंस, मेडिकल टीम और राहत तंत्र रहे सक्रिय
मॉक ड्रिल के दौरान एम्बुलेंस की तेजी, मेडिकल टीम का प्राथमिक उपचार, और घायलों की निकासी की प्रक्रिया का प्रभावशाली संचालन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सभी एजेंसियों के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया समय को परखना था।
पूर्व तैयारी और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम
रेलवे प्रशासन द्वारा इस मॉक ड्रिल के लिए पूर्व योजना और प्रशिक्षण की व्यवस्था पहले से की गई थी। विभिन्न विभागों को उनके सटीक जिम्मेदारियों के साथ कार्य सौंपा गया था।
इस पूरे आयोजन के दौरान, रेलवे अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन में प्रोफेशनलिज्म और तत्परता का प्रदर्शन किया।
