औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में विश्वकर्मा पूजा की धूम, बाजार से लेकर कारखानों तक तैयारियां पूरी
जमशेदपुर : लौह नगरी जमशेदपुर में विश्वकर्मा पूजा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शहर का औद्योगिक माहौल पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंग चुका है। कारखानों, छोटे-बड़े उद्योगों, वर्कशॉप और गैराजों से लेकर कार्यालयों और बाजारों तक जगह-जगह तैयारियां चल रही हैं। भगवान विश्वकर्मा को उद्योग-धंधों और तकनीकी कार्यों का देवता माना जाता है, ऐसे में औद्योगिक शहर जमशेदपुर में इस उत्सव का महत्व और भी अधिक है।
बाजारों में रौनक, लड्डू-बुंदिया की बढ़ी मांग
पूजा से पहले जमशेदपुर का बाजार पूरी तरह सज चुका है। साकची, बिष्टुपुर, कदमा, मानगो, सोनारी और जुगसलाई के बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाएं, फोटो, कलश, धूप-अगरबत्ती, आर्टिफिशियल फूलों और ताजे फूलों की बिक्री तेज हो गई है। सबसे ज्यादा डिमांड मिठाई दुकानों में देखी जा रही है। लड्डू और बुंदिया की बिक्री चरम पर है, क्योंकि इन्हें ही विशेष रूप से भगवान को भोग और प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से बारिश ने कारोबार को प्रभावित किया था, लेकिन अब खरीदारों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। अंतिम समय तक बिक्री में तेजी बनी रहने की संभावना है।
कारखानों और वर्कशॉप में जोर-शोर से तैयारी
जमशेदपुर की पहचान टाटा स्टील, ऑटोमोटिव सेक्टर और सैकड़ों लघु व मध्यम उद्योगों से है। यहां की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से लेकर छोटे गैराजों तक विश्वकर्मा पूजा का आयोजन धूमधाम से होता है। मजदूरों और कर्मचारियों ने पूजा स्थल को सजाने का काम शुरू कर दिया है। फैक्ट्रियों और वर्कशॉप में मशीनों की विशेष सफाई की जा रही है। पूजा वाले दिन मशीनों को लाल कपड़े, फूल-मालाओं और नारियल से सजाकर उनकी पूजा की जाएगी।
छोटे गैराजों और मोटर मैकेनिक वर्कशॉप में भी इसी परंपरा का पालन किया जाता है। यह दिन मजदूरों और कारीगरों के लिए खास होता है क्योंकि वे इसे अपने परिश्रम और आजीविका का पर्व मानते हैं।
ग्राहकों और कर्मचारियों का उत्साह
पूजा सामग्री खरीदने आए एक ग्राहक ने बताया – “हम प्लांट के अंदर हर साल विश्वकर्मा पूजा करते हैं। महंगाई थोड़ी जरूर है, लेकिन पूजा तो करनी ही है। भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से ही कामकाज चलता है।”
वहीं, एक मिठाई दुकानदार ने कहा – “विश्वकर्मा पूजा के मौके पर बुंदिया और लड्डू की सबसे ज्यादा मांग रहती है। सुबह से ही ग्राहक लगातार ऑर्डर दे रहे हैं।”
भव्य आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी
पूजा के दिन सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। कई संस्थान और यूनियन बड़े स्तर पर भजन-कीर्तन और सामूहिक भोज का आयोजन करेंगे। पूजा के बाद 19 सितंबर को विभिन्न संस्थानों और मोहल्लों की झांकियां और शोभायात्राएं भी निकलेंगी, जिनमें घोड़े और ऊंट भी शामिल होंगे।
20 सितंबर की शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें भोजपुरी व अन्य कलाकारों के कार्यक्रम की भी तैयारियां चल रही हैं।
महानगर में पर्व का उल्लास
विश्वकर्मा पूजा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गया, बल्कि यह औद्योगिक शहर की पहचान का भी प्रतीक बन चुका है। मजदूरों, कर्मचारियों, कारीगरों और आम नागरिकों के लिए यह उत्सव आपसी मेल-जोल और आनंद का अवसर है। शहर की गलियां सज चुकी हैं और हर वर्ग के लोग इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
