पर्वतों के बीच पहुंचा प्रशासन: कोलाबाडय़िा टोला में डीसी ने सुनीं ग्रामीणों की पीड़ा, विकास का दिया भरोसा
जमशेदपुर; जिले के दूरस्थ और दुर्गम कोलाबाडय़िा टोला में बुधवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी बाइक और पैदल यात्रा कर घाटियों और पहाड़ों को पार करते हुए इस सुदूर गांव पहुंचे। घने जंगलों और दुर्गम पगडंडियों के बीच स्थित इस गांव में पहली बार कोई डीसी सीधे ग्रामीणों से संवाद करने आया। इस मौके पर ग्रामीणों ने वर्षों से चली आ रही समस्याएं खुलकर सामने रखीं, जिनका उपायुक्त ने मौके पर ही समाधान का भरोसा दिया।
पहाड़ पार, पगडंडी का रास्ता… और फिर सीधा संवाद
कोलाबाडय़िा टोला, जो गुड़ाबांदा प्रखंड के फॉरेस्ट ब्लॉक में स्थित है, तक पहुंचने के लिए डीसी और उनकी टीम को बाइक से पहाड़ी रास्तों पर चलना पड़ा, फिर पैदल यात्रा करनी पड़ी। इस रोमांचक लेकिन चुनौतीपूर्ण सफर के बाद जब उपायुक्त गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों में उम्मीद की नई किरण जगी। उपायुक्त ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों की गुहार: सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा चाहिए साहब!
गांव की सबसे बड़ी समस्या है पहुंच पथ की कमी। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में यह इलाका पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाता है।
इसके अलावा, बिजली की अनियमित आपूर्ति, पेयजल संकट, प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम शामिल न होना, स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं की गैरमौजूदगी जैसी मूलभूत समस्याएं भी सामने आईं।
महिलाओं ने बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जाहिर की।
मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश
डीसी कर्ण सत्यार्थी ने संवाद के दौरान सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने दो टूक कहा, “विकास योजनाएं कागज पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही ही शासन की पहचान है।”
विद्यालय व आंगनबाड़ी का निरीक्षण
उपायुक्त ने प्राथमिक विद्यालय और अस्थायी आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा कर वहां की व्यवस्था देखी। बच्चों से संवाद कर उनकी पढ़ाई, उपस्थिति और पोषण संबंधी जानकारी ली।
उन्होंने शिक्षकों से भी बात की और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा,
“आपका भविष्य आपकी मेहनत में है। रोज स्कूल आकर मन लगाकर पढ़ें, यही जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता है।”
सामुदायिक भागीदारी से ही होगा विकास
उपायुक्त ने कहा कि सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में स्थानीय लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी है। उन्होंने अपील की कि ग्रामीण समय-समय पर पंचायत और प्रखंड स्तर पर अपनी समस्याएं रखें और योजनाओं की निगरानी में भाग लें।
अधिकारियों की मौजूदगी और भरोसा
इस दौरे में घाटशिला अनुमंडल पदाधिकारी सुनील चंद्र, प्रखंड विकास पदाधिकारी डांगुर कोड़ाह, पंचायत प्रतिनिधि और कई विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
सभी अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि हर समस्या का समाधान किया जाएगा और प्रशासन उनकी हर संभव मदद करेगा।
निष्कर्ष: विकास अब पहाड़ों के पार
कोलाबाडय़िा टोला जैसे सुदूर गांवों तक प्रशासन की पहुंच यह दर्शाता है कि अब विकास केवल शहरों या सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा।
“हर गांव, हर घर तक विकास पहुंचे — यही है नए झारखंड का सपना, जिसे साकार करने की ओर प्रशासन ने एक और मजबूत कदम बढ़ाया है।”
