मरांडी के फिर से चुनाव लड़ने की मांग से धनवार में राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है
भाजपा के राज्य प्रमुख को महत्वपूर्ण गिरिडीह जिला विधानसभा सीट पर बहुदलीय चुनौती का सामना करना पड़ रहा है
प्रमुख बिंदु:
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विपक्षी गठबंधन की चुनौती के बीच बाबूलाल मरांडी ने घरेलू मैदान बचाया
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पिछले पांच चुनावों में निर्वाचन क्षेत्र ने पांच अलग-अलग विजेताओं को देखा
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हाल के लोकसभा नतीजों से पता चलता है कि क्षेत्र में भाजपा को 44,000 वोटों का फायदा हुआ है
रांची – धनवार निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य एक उच्च जोखिम वाले युद्ध के मैदान में बदल गया है क्योंकि कई पार्टियां आगामी राज्य चुनावों में नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
धनवार में चुनावी गतिशीलता में 2000 के बाद से महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, जो निर्वाचन क्षेत्र के अस्थिर मतदान पैटर्न को दर्शाता है।
ऐतिहासिक चुनाव परिणाम:
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वर्ष |
विजेता |
दल |
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2000 |
आरके राय |
भाजपा |
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2005 |
आरके राय |
भाजपा |
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2009 |
एन. अंसारी |
जेवीएम |
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2014 |
आर.यादव |
सीपीआई (एमएल) |
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2019 |
बी मरांडी |
जेवीएम |
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सुरेश कुमार ने टिप्पणी की, “धनवार में राजनीतिक माहौल चरम पर पहुंच गया है, प्रत्येक पार्टी अपनी सबसे मजबूत अभियान रणनीतियों को सामने ला रही है।”
प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम:
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विपक्षी गठबंधन का गठन
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सीपीआई(एमएल) की अलग उम्मीदवारी
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जेवीएम का भाजपा में विलय
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लोकसभा चुनावी पैटर्न
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ऐतिहासिक कांग्रेस का प्रभुत्व
इस निर्वाचन क्षेत्र के लोकसभा प्रदर्शन, जहां केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने पर्याप्त बढ़त हासिल की, ने भाजपा खेमे को उत्साहित कर दिया है।
चुनावी महत्व
सत्ताधारी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों द्वारा रणनीतिक गठबंधन बनाने के साथ लड़ाई तेज हो गई है।
झामुमो, कांग्रेस, राजद और सीपीआई (एमएल) सहित कई हितधारक इस चुनावी मुकाबले में एकजुट हुए हैं।
