सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में फंसीं, क्या नासा की जिम्मेदारी तय होगी?

नासा के बोइंग स्टारलाइनर मिशन में तकनीकी गड़बड़ी से देरी, अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और विल्मर को स्पेसएक्स द्वारा सुरक्षित वापसी की योजना।

NASA के बोइंग स्टारलाइनर की असफलता के चलते सुनीता विलियम्स और विल्मर की वापसी 8 महीने तक टली, स्पेसएक्स करेगा रेस्क्यू ऑपरेशन।

पिछले तीन महीना से अंतरिक्ष में एक अजीबो गरीब स्थिति बनी हुई है। सुनीता विलियम्स और बेरी विल मोर अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं, यह खबर पूरी दुनिया की मीडिया में सुर्खियां बटोर रही है।

5 जून 2024 को ये दोनों एस्ट्रोनॉट्स एक स्पेसक्राफ्ट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए। यह बोइंग के नए स्पेसक्राफ्ट की पहली टेस्ट फ्लाइट थी। योजना के मुताबिक, इन्हें 8 दिन के बाद वापस आ जाना चाहिए था। लेकिन बोइंग के जिस स्पेसक्राफ्ट में ये दोनों अंतरिक्ष यात्री गए थे, उसमें कुछ खराबी आ गई।

यान में खराबी को देखते हुए नासा ने दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को आने से मना कर दिया।

पहले इनका मिशन कुछ दिनों के लिए बढ़ाया गया, फिर कुछ हफ्ते बीते और अंततः ढाई महीना के बाद नासा ने निर्णय लिया कि यह स्पेसक्राफ्ट वापस आने के लिए सुरक्षित नहीं है। अब दोनों अंतरिक्ष यात्री 8 दिन की बजाय 8 महीना के बाद वापस आ पाएंगे। इनके रेस्क्यू मिशन में एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

यहाँ आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि चांद पर आखिरी इंसान को गए 50 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। पिछले 25 सालों से स्पेस में जो भी मानवीय गतिविधियां हुई हैं, वह एक रिसर्च लैबोरेट्री तक सीमित है। पृथ्वी की सतह से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर चक्कर काटने वाली इस प्रयोगशाला का नाम है – इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आई एस एस)। आई एस एस को मुख्य रूप से अमेरिका और रूस ही मिलकर चलाते हैं ।

वैसे इसमें कुछ अन्य देश भी शामिल हैं। इन्हीं दो मुख्य देश के स्पेसक्राफ्ट आई एस एस तक पहुंच सकते हैं। शुरुआत में इस तक पहुंचने के लिए नासा अपने स्पेस शटल का इस्तेमाल करती थी। लेकिन यह स्पेस शटल कई हादसों का शिकार हुआ।

साल 1986 में स्पेस शटल चैलेंजर में एक हादसा हुआ और उस शटल में मौजूद सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। वर्ष 2003 में स्पेस शटल कोलंबिया के साथ फिर एक हादसा हुआ और स्पेस शटल में मौजूद कल्पना चावला समेत सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। इन जानलेवा हादसों के बाद नासा ने अपने स्पेस शटल कार्यक्रम को बंद करने का फैसला लिया और 2011 में आखिरी स्पेस शटल आईएसएस पर जाकर वापस आई। स्पेस शटल से किनारा करने के बाद अमेरिका रूस पर निर्भर हो गया।

कई मामलों में रूस का सोयुज स्पेसक्राफ्ट अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर स्पेस स्टेशन तक जाता रहा। लेकिन geo political tension की वजह से यह स्थिति बहुत ज्यादा दिन नहीं चली। इसलिए अमेरिका ने अपनी जमीन से अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के लिए एक दूसरे प्लान पर काम करना शुरू किया।

प्लान यह था कि नासा की जिम्मेदारियां को कम करके अपने देश की ही प्राइवेट स्पेस एजेंसी को इस काम के लिए तैयार किया जाए। दो प्राइवेट कंपनियों के नाम फाइनल हुए – बोइंग और स्पेस एक्स। बोइंग कंपनी एयरोस्पेस के मामले में तब एक अनुभवी और स्पेस एक्स एक नई नवेली कंपनी थी। इसे 2002 में एलन मस्क ने शुरू किया था ।

वर्ष 2020 में स्पेस एक्स ने पहले स्पेस फ्लाइट चलाई जो सफल रही। इस सफल फ्लाइट के बाद नासा ने स्पेस एक्स को स्पेस मिशन के लिए सर्टिफाई कर दिया और तब से अब तक स्पेस एक्स आठ सफल मिशन कर चुकी है। दूसरी तरफ बोइंग की स्पेसक्राफ्ट का नाम है – स्टार लाइनर। इसका सफर उतना अच्छा नहीं रहा, जितना स्पेस एक्स का। बोइंग की पहली मानव युक्त फ्लाइट में सुनीता विलियम्स और विल्मर गए हुए हैं। यह उड़ान तीन बार कैंसिल होने के बाद चौथी बार एटलस 5 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजी गई।

वहां पहुंच कर हीलियम लीकेज की समस्या सामने आई। लॉन्च से पहले भी हीलियम लीक होने की बात सामने आई थी लेकिन नासा के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इसे मामूली बताया और कहा कि इससे एयरक्राफ्ट के परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। और इस हीलियम लीकेज को नजर अंदाज कर स्पेसक्राफ्ट को उड़ान भरने की इजाजत दे दी गई।

शुरुआती दिक्कतों के बाद अंततः यह स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़ गया। ध्यान रहे कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है और ऐसे में स्पेसक्राफ्ट और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का आपस में जुड़ना एक बड़ी चुनौती होती है। गड़बड़ियां सामने आने की वजह से इस स्पेसक्राफ्ट की वापसी की तारीख टलती चली गई। पिछले 24 अगस्त को हुई नासा की हाई लेवल मीटिंग में फैसला लिया गया कि बोइंग का स्टार लाइनर एयरक्राफ्ट बिना अंतरिक्ष यात्रियों को लिए खाली ही धरती पर वापस आएगा और उसकी जगह स्पेस एक्स के क्रूड ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से सुनीता विलियम्स समेत दोनों की वापसी होगी और यह वापसी फरवरी 2025 तक हो सकेगी।

पहले से जो चार अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मौजूद हैं, उन्हें भी धरती पर वापस लाना है। इसलिए स्पेस एक्स का मौजूदा क्रू 8 मिशन उन चार यात्रियों को ही वापस ला सकेगा। स्पेस एक्स का क्रू 9 मिशन सितंबर महीने में धरती से लांच होना है जिसमें दो अंतरिक्ष यात्री भेजे जाएंगे और दो सीटें खाली रहेंगी जिन पर बैठ कर सुनीता विलियम्स और वेरी बिल मोर लौट सकेंगे। तो क्या अंतरिक्ष में इनके लिए खाने पीने की सामग्री कम पड़ जाएगी या ऑक्सीजन कम पड़ेगा? नहीं, इन सब की पूरी व्यवस्था इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर है। हां, अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन का खतरा जरूर रहता है लेकिन उससे बचने के लिए इन्हें पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें हर दिन कई घंटे एक्सरसाइज भी करना होता है।

उपयुक्त जानकारी को आपके समक्ष परोसते हुए मुझे यह भी बताना है कि प्रथम दृष्टया इसमें नासा की चूक या विफलता कई जगहों पर स्पष्ट दिख रही है। दो – दो बार स्पेस शटल में हादसा और कई अंतरिक्ष यात्रियों की मौत, फिर एक्सीडेंट फ्री स्पेस शटल पर काम करने के बजाय उस कार्यक्रम को ही बंद कर देना, शुरुआत में कई बार दिक्कतें आने के बावजूद बोइंग को अंतरिक्ष उड़ान के लिए सर्टिफाई कर देना, उड़ान से पहले स्पेसक्राफ्ट से हीलियम लीकेज को मामूली बताकर नजरअंदाज करना जबकि वही हीलियम लीकेज अब बड़ा खतरा बन गया है। यहां पाठकों को यह बताना भी जरूरी है कि बोरिंग की विश्वसनीयता इन दिनों वैसे ही डांवाडोल चल रही है। हैंगर में खड़े विमानों में बड़ी खराबी आ जा रही है।

सोशल मीडिया पर ऐसे मीम देखे जा सकते हैं जहां लोग कह रहे हैं कि अगर जान खतरे में डालना है तो बोइंग से सफर करो। लेकिन नासा ने अपने तरीके से काम किया और अच्छा या बुरा नतीजा सामने है।

इन स्थितियों के बावजूद ना तो अमेरिका की मीडिया और ना ही अमेरिकी जनता नासा के खिलाफ कोई उंगली उठा रही है। क्योंकि इससे नासा की छवि को बट्टा लगता और विश्व के सबसे पावरफुल देश को भी स्पेस पावर होने पर सवाल खड़े होते। अगर ऐसी कोई चूक हमारे यहां भारत में इसरो से हो गई होती तो विपक्ष को बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया होता और इसके लिए वह मोदी और भाजपा को पानी पी पीकर कोस रहे होते। टीवी चैनलों पर होने वाली डिबेट में बैठकर सब के सब विपक्षी नेता अंतरिक्ष विज्ञानी बन गए होते।

एक विश्वसनीय और बड़ी अंतरिक्ष ताकत के रूप में उभर रहे भारत की साख पर बट्टा लगाने से ये विपक्षी नेता कतई बाज नहीं आते। अमेरिका की स्थिति देखकर क्या ये नेता कोई सीख-सबक लेंगे? भारत अपने आगामी गगनयान मिशन के लिए इस पूरी स्थिति से कोई सबक ले, इससे कहीं ज्यादा जरूरत है भारत के विपक्ष को सबक लेने की। मोदी विरोध में भारत विरोध तक न जाने की सबक।

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