हाई कोर्ट ने मेनहार्ट घोटाला मामले में फैसला सुरक्षित रखा
21 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी पर विधायक सरयू राय की याचिका पर फैसले का इंतजार
सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने पुलिस शिकायत दर्ज करने में देरी पर सवाल उठाए।
रांची – झारखंड उच्च न्यायालय ने पूर्वी सिंहभूम के विधायक सरयू राय की ओर से दायर याचिका मेनहार्ट घोटाला मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
यह मामला रघुवर दास के शहरी विकास मंत्री के कार्यकाल के दौरान रांची के सीवरेज ड्रेनेज डीपीआर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।
सुनवाई के बाद रॉय ने कहा, “हमने रांची के सीवरेज ड्रेनेज डीपीआर तैयार करने में हुए 21 करोड़ रुपये के घोटाले के संबंध में अपना मामला प्रस्तुत किया है।”
अदालत ने सवाल किया कि जब पहली बार अनियमितताएं सामने आईं तो पुलिस शिकायत या सिविल अदालत में मामला क्यों नहीं दर्ज किया गया।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दिसंबर 2020 में एक प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की गई थी, लेकिन आज तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
रॉय ने मेनहार्ट एजेंसी पर 21 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया और सबसे पहले इस मुद्दे को झारखंड विधानसभा में उठाया।
याचिकाकर्ता ने पिछले ढाई वर्षों में एसीबी की जांच में प्रगति की कमी पर प्रकाश डाला।
यह मामला रांची की सीवरेज प्रणाली विकसित करने के लिए 2003 में दिए गए उच्च न्यायालय के आदेश और उसके बाद सलाहकार चयन विवाद से जुड़ा है।
रॉय ने आरोप लगाया कि 2005 में शहरी विकास मंत्री के रूप में रघुबर दास ने सलाहकार के चयन में बदलाव किया, जिसके परिणामस्वरूप मेनहार्ट की नियुक्ति हुई।
झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य और शहरी विकास परियोजनाओं पर इस मामले के प्रभाव को देखते हुए अदालत के फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
